तिरुवनन्तपुरम: केरल के कन्नूर जिले के पप्पिनिस्सेरी के रहने वाले हाशिम वी.पी. पिछले 30 सालों से जवाहर म्युनिसिपल स्टेडियम के सामने गन्ने का रस बेच रहे हैं। एक साधारण-सी सड़क किनारे की दुकान से उन्होंने अपने जीवन में दुनिया घूमने का सबसे बड़े सपने को सच कर दिखाया। छोटे से कारोबार से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे यात्रा के प्रति उनके जुनून में बदल गया। अब तक हाशिम 10 देशों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने इजराइल, फिलिस्तीन, जॉर्डन, मिस्र, इराक, मलेशिया, थाईलैंड, अज़रबैजान, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देशों का दौरा किया है। अब वे आने वाले महीनों में अपनी पत्नी और बड़े भाई के साथ चीन जाने की योजना बना रहे हैं।
एएनआई से बात करते हुए हाशिम ने कहा कि मैं अब तक 10 देशों की यात्रा कर चुका हूं। मेरी आखिरी यात्रा तुर्की की थी, जो बहुत खूबसूरत है। अब तीन महीने बाद चीन जाने का प्लान है। गन्ने का रस बेचकर कमाए गए पैसों से हाशिम ने अपने शहर से बाहर ही नहीं बल्कि देश और विदेश में भी कई जगहों की सैर की। उनकी ज्यादातर यात्राओं में उनकी पत्नी हसीना हमेशा उनके साथ रहीं। उनकी पहली विदेश यात्रा ने उनके लिए नई दुनिया के दरवाजे खोल दिए। इसके बाद उन्होंने पूरे भारत में घूमना शुरू किया और फिर धीरे-धीरे विदेश यात्राएं भी करने लगे।
एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार 67 वर्षीय हाशिम बताते हैं कि उनकी यात्रा की शुरुआत 2012 में दिल्ली यात्रा से हुई थी। उस समय जून-जुलाई का महीना उनके काम का ऑफ-सीजन होता था और वे आमतौर पर दुकान बंद कर घर पर रहते थे लेकिन उनके बड़े भाई से हुई एक बातचीत ने उनकी सोच बदल दी। भाई ने उन्हें यात्रा के महत्व और उससे मिलने वाले अनुभवों के बारे में बताया। उसी दिन से उनके अंदर घूमने का जुनून पैदा हुआ। हाशिम कहते हैं कि उसके बाद से मैंने कभी घूमना नहीं छोड़ा। जब भी मौका मिलता है तो मैं नई जगहें देखने निकल पड़ता हूं।
जितनी चादर उतने पांव पसारो कहावत को हाशिम ने बदल कर रख दिया।