दंतेवाड़ा: सुकमा के बाद अब छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में माओवादियों का बड़ा आत्मसमर्पण हुआ है। बुधवार को सुकमा जिले में 26 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। वहीं शुक्रवार को दंतेवाड़ा में 63 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में 18 महिलाएं हैं। जिन माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, उनमें से 36 पर कुल मिलाकर 1 करोड़ 19 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास के लिए ‘लोन वरातु’ और ‘पुना मार्गम’ नाम की दो योजनाएं चलाई जा रही हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि ‘पुना मार्गम’ योजना के तहत इन माओवादियों ने पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर, पश्चिम बस्तर और माड़ डिवीजन के अलावा ओडिशा सीमा से सटे इलाकों में भी सक्रिय थे। आत्मसमर्पण करने वालों में कालाहांडी एरिया कमेटी के सचिव पाकलू उर्फ प्रदीप ओयाम, डिवीजनल कमेटी के सदस्य मोहन उर्फ आजाद काड़ती और उनकी पत्नी सुमित्रा भी शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में 7 माओवादियों पर 8-8 लाख रुपये, 7 पर 5-5 लाख रुपये और 8 माओवादियों पर 2-2 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को सरकारी नीति के अनुसार पुनर्वास दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बुधवार को सुकमा में आत्मसमर्पण करने वाले 26 माओवादियों में से 13 पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम था। ये माओवादी सुकमा, अबूझमाड़ और ओडिशा सीमा से सटे इलाकों में विभिन्न माओवादी गतिविधियों में शामिल थे। केंद्र सरकार ने चालू वर्ष के 31 मार्च तक देश से माओवाद को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है। पुलिस के अनुसार, पिछले वर्ष ही छत्तीसगढ़ में डेढ़ हजार से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके अलावा सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ों में कई शीर्ष माओवादी नेता मारे भी गए हैं।