इंदौर: भारत का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब दूषित पेयजल के संकट से जूझ रहा है। भागीरथपुरा और शहर से सटे इलाकों में दूषित पानी के कारण अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 3,200 से अधिक लोग बीमार हो गए हैं। इस स्थिति को देखते हुए इंदौर प्रशासन ने जल और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए सिरे से 2,450 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। जानकारी के अनुसार, दूषित पानी के कारण कुल 446 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 10 की हालत गंभीर बनी हुई है। संकट अब भी टला नहीं है।
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, बीते पांच वर्षों में इंदौर में जल आपूर्ति और स्वच्छता पर सरकारी खर्च लगातार बढ़ा है। इंदौर नगर निगम अपने वार्षिक बजट का लगभग 25 से 30 प्रतिशत जल आपूर्ति और स्वच्छता पर खर्च करता है। यह राशि 2021-22 में 1,680 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में प्रस्तावित 2,450 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जबकि इसी अवधि में नगर निगम का कुल बजट 5,135 करोड़ रुपये से बढ़कर 8,200 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
इसके अलावा, एशियाई विकास बैंक (एडीबी), अमृत योजना और स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत भी हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिनका उद्देश्य जल आपूर्ति प्रणाली में सुधार और 24 घंटे सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना था। बावजूद इसके, इतने बड़े खर्च के बाद भी नागरिकों के मूल अधिकार, स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल को सुनिश्चित नहीं किया जा सका।