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स्कूल परीक्षा में ‘कुत्ते का नाम राम’ सवाल पर बवाल, छत्तीसगढ़ में विरोध प्रदर्शन

इस मामले को लेकर हिंदुत्ववादी संगठनों ने प्रदर्शन किया। विवाद शुरू होने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी ने माफी मांग ली।

By कौशिक दत्त, Posted by: प्रियंका कानू

Jan 09, 2026 13:40 IST

रायपुर: कम से कम छत्तीसगढ़ की भाजपा-शासित राज्य के एक स्कूल की परीक्षा में ऐसा ही देखने को मिला। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के एक स्कूल की हाफ-ईयरली परीक्षा में चौथी कक्षा की अंग्रेज़ी परीक्षा के मल्टिपल चॉइस प्रश्न को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उस स्कूल की परीक्षा में सवाल था, “मोना के कुत्ते का नाम क्या है ?” सही उत्तर चुनने के लिए चार विकल्प दिए गए थे, जिनमें से एक विकल्प था — ‘राम’।

इस बात के सामने आते ही विवाद शुरू हो गया। इसी नाम को विकल्प में शामिल किए जाने को लेकर हिंदुत्ववादी संगठनों ने आपत्ति जताई। गुरुवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। इन संगठनों का आरोप है कि हिंदुओं के आराध्य देवता भगवान राम का नाम कुत्ते के नाम के रूप में विकल्प में शामिल कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है। विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिला शिक्षा अधिकारी विजय लाहर का पुतला दहन किया और बाद में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।

महासमुंद के जिलाधिकारी विनय कुमार लांघे ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विवाद बढ़ने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने माफी मांग ली है। उन्होंने कहा कि जो प्रश्नपत्र भेजा गया था, उसमें छपाई के दौरान बदलाव हो गया। उनका दावा है कि इस गलती के लिए स्कूल शिक्षा विभाग जिम्मेदार नहीं है। जानकारी के अनुसार, परीक्षा के प्रश्नपत्र महासमुंद से करीब 150 किलोमीटर दूर राजनांदगांव जिले की एक प्रिंटिंग प्रेस में छपवाए गए थे।

अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा की गोपनीयता के कारण यह गलती पहले सामने नहीं आ सकी। मामला सामने आते ही विवादित विकल्प को हटा दिया गया और उसकी जगह नया विकल्प जोड़ा गया। साथ ही जिस प्रिंटिंग प्रेस में प्रश्नपत्र छपे थे, उनसे भी स्पष्टीकरण मांगा गया है और भेजे गए मूल प्रश्नपत्र की प्रति जमा करने को कहा गया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने का कोई इरादा नहीं था और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए प्रश्नपत्रों की छपाई में और अधिक सावधानी बरती जाएगी।

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