मुंबई : एनसीपी और एनसीपी (एसपी) के नेताओं ने शनिवार को दोनों गुटों के विलय की प्रक्रिया और 28 जनवरी को विमान दुर्घटना में दिवंगत हुए अजित पवार पर लिखे गए एक लेख को लेकर एक-दूसरे पर तीखे हमले किए। एनसीपी नेता आनंद परांजपे ने लेख को लेकर माफी की मांग करते हुए कहा कि इसमें पवार की मृत्यु के बाद भी उनकी छवि को धूमिल किया गया है। यह लेख एनसीपी (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने पार्टी मुखपत्र ‘राष्ट्रवादी’ में लिखा था। शिंदे ने कहा कि विलय का मुद्दा शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट द्वारा बंद कर दिया गया है।
शिंदे ने संवाददाताओं से कहा कि विलय पर अंतिम निर्णय स्थानीय निकाय चुनावों के बाद होना था और उसकी रूपरेखा आपसी चर्चा से तय की जानी थी। अजित पवार के निधन के बाद अब चर्चा करने के लिए कोई नेता ही नहीं बचा है, इसलिए फिलहाल संभावित विलय पर चर्चा का कोई अर्थ नहीं है।
शिंदे ने कहा कि यह धारणा बनाई जा रही है कि उनका गुट आक्रामक रूप से विलय के लिए दबाव बना रहा है, जो सही नहीं है। पार्टी ने अब स्वयं को पुनर्गठित करने पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है।
अपने लेख के संदर्भ में शिंदे ने कहा कि उन्होंने यह नहीं कहा कि अजित पवार ने गलती की थी। मैंने केवल यह कहा कि वे पार्टी में हुए विभाजन को सुधारना चाहते थे।
इस बीच, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता आनंद परांजपे ने शिंदे के लेख की निंदा करते हुए दिवंगत नेता के परिजनों की ओर से माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि लेख में उन परिस्थितियों को लेकर झूठे और भ्रामक दावे किए गए हैं, जिनके चलते अजित पवार ने अविभाजित एनसीपी छोड़ी थी।
परांजपे ने कहा कि उनके निधन के बाद भी उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और उनके परिवार से माफी मांगी जानी चाहिए। पार्टी कार्यकर्ता इन आरोपों का करारा जवाब देंगे।
फरवरी 2026 के अंक में प्रकाशित ‘राष्ट्रवादी’ पत्रिका में श्रद्धांजलि लेख में शिंदे ने दावा किया था कि अदृश्य ताकतों की चालें, धमकियां और झूठे आरोपों का जाल ऐसी स्थिति पैदा कर गया, जिससे अजित पवार को मूल संगठन से अलग होना पड़ा और शरद पवार द्वारा स्थापित पार्टी में विभाजन हुआ।
परांजपे ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अजित पवार ने वर्षों से आंतरिक चर्चाओं में भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन की वकालत की थी और उन्होंने साजिश या दबाव के कारण पार्टी नहीं छोड़ी थी।
उन्होंने अजित पवार के निधन के तुरंत बाद एनसीपी (एसपी) द्वारा विलय की चर्चा उठाए जाने के समय को राजनीतिक रूप से असंवेदनशील बताया। परांजपे ने दोहराया कि पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल विलय पार्टी के एजेंडे में नहीं है।
अजित पवार के निधन के बाद दोनों गुटों के बीच तनाव के बीच यह तीखी बयानबाजी सामने आई है, जहां पुनर्मिलन और दिवंगत नेता की विरासत को लेकर दोनों पक्ष अलग-अलग रुख अपना रहे हैं।
वरिष्ठ एनसीपी नेता और राज्य मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि रोज़-रोज़ विलय पर चर्चा करने की क्या आवश्यकता है। सुनेत्रा पवार अब उपमुख्यमंत्री हैं और जल्द ही एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगी। वही इस मुद्दे पर चर्चा कर निर्णय लेंगी।