राहुल बोस
2025 का साल भारतीय खेल जगत के लिए एक निर्णायक मोड़ है क्योंकि इसी वर्ष भारत सरकार ने राष्ट्रीय खेल नीति को मंजूरी दी है। इसका कार्यान्वयन नए साल से ही शुरू हो गया है।
केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर जीते गए पदकों की संख्या से ही देश के खेलों की प्रगति को मापना संभव नहीं है। खेलों के प्रति पूरे देश के दृष्टिकोण को एक सुव्यवस्थित प्रणाली के माध्यम से अधिक सकारात्मक बनाना भी उतना ही जरूरी है। सरकारी और निजी निवेश में वृद्धि, नीतिगत सुधार और बुनियादी ढांचे के विस्तार का काम तेजी से शुरू हो चुका है जिसे नए साल में और आगे बढ़ाना होगा।
भारत में खेलों का संचालन किस तरह होना चाहिए इसकी स्पष्ट दिशा नई खेल नीति में दी गई है। इसमें किसी व्यक्ति या विशेष समूह की मनमर्जी के बजाय पारदर्शिता और एक निश्चित कार्यान्वयन ढांचे पर जोर दिया गया है। इस कानून को पढ़ते ही स्पष्ट हो जाता है कि इसमें प्राथमिकता खिलाड़ियों को दी गई है। इसलिए इस नीति के लागू होने की ओर सबकी निगाहें टिकी हैं।
2025 में क्रिकेट (महिला क्रिकेट सहित) के साथ साथ स्क्वैश, बॉक्सिंग, हॉकी, एशियन यूथ गेम्स और पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी भारत ने शानदार सफलता हासिल की है। मेरा पसंदीदा खेल रग्बी भी काफी आगे बढ़ा है। राजगीर में आयोजित एशिया रग्बी एमिरेट्स अंडर-20 सेवेंस में भारत की महिला टीम ने कांस्य पदक जीता। यह उपलब्धि भारत में खेल क्रांति का ही प्रतिबिंब है।
(लेखक: रग्बी इंडिया के अध्यक्ष)