गौतम गंभीर कोच नहीं, धुरंधर हैं, जादूगर हैं। टीम इंडिया को विश्व चैंपिनय बनाने का मंत्र उन्हें खूब आता है। एशिया कप हो या चैंपियंस ट्रॉफी या अब टी-20 वर्ल्ड कप। गौतम गंभीर ने अपना लोहा मनवा दिया है। उनकी कोचिंग में टीम इंडिया सिकंदर और धुरंधर बन चुकी है। गौतम गंभीर ने अपने प्रदर्शन से आलोचकों का मुंह बंद कर दिया है। गौतम गंभीर की कोचिंग में टीम इंडिया ऐसे ही विश्व चैंपियन नहीं बनी है। उन्होंने खिलाड़ियों की मानसिकता को ही बदल दिया है। उन्होंने टीम इंडिया को जो सीक्रेट मंत्र दिया था, उसके दम पर ही सूर्यकुमार यादव की टीम आज विश्व चैंपियन बन पाई है। इसका खुलासा न्यूजीलैंड को फाइनल में हराते ही हो गया।
जी हां, टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर माइलस्टोन का जश्न मनाने में यकीन नहीं रखते हैं। वह ट्रॉफी का जश्न मनाना पसंद करते हैं। अहमदाबाद में फाइनल जीत के बाद मीडिया से बात करते हुए गौतम गंभीर ने अपने उस सीक्रेट मंत्र का खुलासा किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके कार्यकाल में टीम का कल्चर नंबरों के पीछे भागने के बजाय सिल्वर वेयर यानी ट्रॉफी जीतने पर बना है।
मैच जीतने के बाद गौतम गंभीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘सूर्या के साथ मेरी सिंपल फिलॉसफी हमेशा से यही रही है कि माइलस्टोन मायने नहीं रखते। ट्रॉफियां मायने रखती हैं। इंडियन क्रिकेट में बहुत लंबे समय से हम माइलस्टोन के बारे में बात करते आ रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि जब तक मैं यहां हूं, हम माइलस्टोन के बारे में बात नहीं करेंगे।’ गौतम गंभीर ने कप्तान सूर्यकुमार यादव की लीडरशिप और पर्सनल रिकॉर्ड से अधिक टीम की सफलता को प्रायोरिटी देने की इसी फिलॉसफी को शेयर करने के लिए उनकी तारीफ की।
सूर्या की जमकर तारीफ
उन्होंने आगे कहा, ‘देखिए, मैंने पहले भी कहा है कि मुझे लगता है कि सूर्या ने इस फॉर्मेट में मेरी ज़िंदगी बहुत आसान कर दी है। मुझे लगता है कि वह एक ज़बरदस्त लीडर हैं। मुझे लगता है, हां, उन्होंने बिल्कुल सही कहा कि वह कैप्टन नहीं कहलाना चाहते, वह लीडर कहलाना चाहते हैं क्योंकि ड्रेसिंग रूम में लीडर, कैप्टन से कहीं ज़्यादा बड़ा होता है।’
टीम इंडिया के अप्रोच पर क्या कहा ?
गंभीर ने टूर्नामेंट के दौरान दिखाए गए निडर बैटिंग अप्रोच की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह इस बात का एक उदाहरण है कि खिलाड़ी टीम के मकसद को पर्सनल उपलब्धियों से ऊपर रखते हैं। भारतीय टीम के पूर्व ओपनर गंभीर ने कहा, ‘आप इसे बहुत आसानी से देख सकते हैं। आप इसे पिछले तीन गेम में देख सकते हैं, संजू ने क्या किया। 97 नॉट आउट, 89-88. सोचिए अगर आप किसी माइलस्टोन के लिए खेल रहे होते। शायद हम 50 तक नहीं पहुंच पाते।
टीम इंडिया को मिला था यही मंत्र
क्रिकेट की उपलब्धियों का जश्न मनाने के तरीके में बदलाव की मांग करते हुए गंभीर ने कहा कि फोकस हमेशा सामूहिक गौरव पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘माइलस्टोन का जश्न मनाना बंद करो, ट्रॉफ़ी का जश्न मनाओ। यह जरूरी होने वाला है क्योंकि टीम स्पोर्ट का बड़ा मकसद ट्रॉफ़ी जीतना है, न कि इंडिविजुअल रन बनाना। यह मेरे लिए कभी मायने नहीं रखता था, और यह मेरे लिए कभी मायने नहीं रखेगा।’ गंभीर ने यही मंत्र टीम इंडिया को दिया था।
गौतम गंभीर ने कहा कि वह खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि सूर्यकुमार के साथ उनका भी यही विज़न है, जिससे एक मज़बूत टीम कल्चर बनाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा, और मुझे लगता है कि सूर्या ने… असल में मैं बहुत खुशकिस्मत रहा हूं कि सूर्या और मैं एक ही पेज पर थे, खासकर इस मामले में।’