कोलंबो : टॉस जीतकर ‘टू बैट ऑर नॉट टू बैट’ नहीं बल्कि कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम की बाईस गज पर उतरने से पहले क्रिकेट दुनिया की सबसे आकर्षक प्रतिद्वंद्विता घूम रही है एक दूसरे सवाल के इर्द-गिर्द हाथ मिलाएंगे या नहीं मिलाएंगे? उससे भी बड़ा सवाल हालिया कूटनीतिक और राजनीतिक तनातनी की सीमा पार कर जीत होगी या नहीं क्रिकेटीय स्पिरिट की?
पिछले साल कश्मीर के पहलगाम में पाक आतंकियों के हमले और उसके बाद भारत–पाक संघर्ष के बाद तलहटी में पहुंच चुके दो पड़ोसी देशों के संबंधों का असर पिछले कुछ महीनों में सबसे ज्यादा दिखा है क्रिकेट मैदान पर। पिछले सितंबर एशिया कप में पाक कप्तान से हाथ नहीं मिलाया था भारत के कप्तान ने। वही ‘ट्रेडिशन’ बरकरार रखा था महिला सीनियर टीम ने यहां तक कि देश की अंडर–19 टीम ने भी। स्वाभाविक रूप से शनिवार को कोलंबो की प्रेस मीट में दोनों देशों के कप्तानों को ‘हैंडशेक’ को लेकर सवालों का सामना करना पड़ा।
पाक कप्तान सलमान आगा ने इस सवाल के जवाब में इशारों में टिप्पणी की कि उम्मीद करूंगा खेल उसी स्पिरिट में हो जिस तरह शुरुआत से होता आया है। यानी युद्ध और राजनीति का असर खेल के मैदान पर पड़े यह नहीं चाहते पाक कप्तान। सीधे ‘हैंडशेक’ पर जवाब टालते हुए आगा ने जोड़ा कल देखेंगे क्या होता है।
‘हैंडशेक’ को लेकर कोलंबो की प्रेस मीट में यही सवाल भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव से भी पूछा गया। पिछले सितंबर एशिया कप के समय मैच से पहले ही घोषणा हो गई थी कि भारतीय क्रिकेटर पाक खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाएंगे। इस बार सूर्यकुमार की टिप्पणी है कि 24 घंटे इंतजार कीजिए। अच्छा खाइए सोइए। फिर देखेंगे कल क्या होता है। तो क्या पाक मांग मानते हुए कोलंबो में हाथ मिलाने जा रहे हैं सूर्य और सलमान? यूक्रेन के एथलीट अब भी लेकिन रूसी या बेलारूसी एथलीटों से हाथ नहीं मिलाते। टेनिस में यह दृश्य अक्सर देखा जाता है!
पाकिस्तान के आम लोग क्या चाहते हैं? इस्लामाबाद के पत्रकार आतिफ शाहजाद साहिर से संपर्क करने पर उनकी टिप्पणी है कि पाकिस्तान के औसत आम लोगों की राय यही है कि क्रिकेट मैदान पर शिष्टाचार होना चाहिए। आतिफ ने जोड़ा कि यहां के लोग मानते हैं सियासत अलग है खेल अलग। उनके अनुसार इन दोनों को मिला रही है भारत सरकार की कठोर नीति। पहले भी युद्ध के समय मैच हुए हैं तब ऐसा नहीं हुआ।
1999 वनडे विश्व कप में मैनचेस्टर में जब भारत–पाक आमने-सामने हुए उस समय कारगिल में लड़ाई चल रही थी। तब भी दोनों देशों के कप्तानों और खिलाड़ियों ने हाथ मिलाया था। यही याद दिलाना चाहते हैं पाक पत्रकार। उलटी तस्वीर भी है। 1987 के वनडे विश्व कप की मेजबानी भारत पाकिस्तान के साथ संयुक्त रूप से क्यों करेगा इस पर सवाल उठाया था पूर्व भारतीय कप्तान मंसूर अली खान पटौदी ने लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद के दौर में नई दिल्ली–इस्लामाबाद तनाव जैसे क्रिकेट के मैदान में कहीं ज्यादा घुस आया है। पिछले एशिया कप में ही पाकिस्तान के हारिस रऊफ ने गैलरी के पास भारतीय दर्शकों के सामने राफाल विमान गिरने का इशारा किया था। जसप्रीत बुमराह ने रऊफ को बोल्ड कर वही अंदाज लौटा दिया। सीधे तौर पर कोई कुछ न कहे लेकिन बाईस गज पर राजनीति या कूटनीति की लड़ाई जोरदार ढंग से दाखिल हो जाती है।
यह तनातनी नया मोड़ लेती है जब इस बार के टी-20 विश्व कप से बांग्लादेश नाम वापस लेता है। ढाका के समर्थन में इस्लामाबाद भी बहिष्कार की चेतावनी देता है। कुछ दिन पहले जब आईसीसी प्रतिनिधि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड अधिकारियों के घोषित बहिष्कार को तोड़ने के लिए बैठक करने पहुंचे तब पाकिस्तान की ओर से एक प्रमुख शर्त थी मैच से पहले टॉस के समय भारतीय कप्तान को हैंडशेक करना होगा। इसलिए पाकिस्तान के कई लोग मान रहे हैं कि रविवार को कोलंबो में क्रिकेट दुनिया वह ‘बहुप्रतीक्षित’ हैंडशेक देख सकती है।
इतने सबके बीच शाहीन अफरीदी–अभिषेक शर्मा की संभावित टक्कर या उस्मान तारिक क्या सचमुच भारतीय मिडिल ऑर्डर को परेशानी में डालेंगे यह सवाल जैसे बैकफुट पर चला गया है लेकिन सलमान और सूर्य हाथ मिला भी लें तो क्या दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंध मधुर हो जाएंगे?
कूटनीतिक विश्लेषकों के साथ कई वरिष्ठ क्रिकेटरों का मानना है कि उपमहाद्वीप की राजनीतिक स्थिति फिलहाल ऐसी है कि ऐसा होना बहुत कठिन है। इस जटिलता में बांग्लादेश भी उलझ गया है। रसायन विज्ञान में ‘कैस्केड रिएक्शन’ नाम का एक शब्द है जहां एक अभिक्रिया से बना पदार्थ दूसरी अभिक्रिया में जुड़ता है। इस तरह झरने के पानी की तरह लगातार कई रिएक्शन चलते रहते हैं। इस विश्व कप से जुड़ी घटनाएं कुछ उसी ‘कैस्केड रिएक्शन’ जैसी हैं। आईपीएल नीलामी में बिकने के बावजूद बीसीसीआई की मांग पर केकेआर ने बांग्लादेशी गेंदबाज मुस्ताफिजुर रहमान को बाहर कर दिया। उसके जवाब में बांग्लादेश कहता है, विश्व कप नहीं खेलेंगे। आईसीसी स्कॉटलैंड को बुलाता है। उधर पाकिस्तान कहता है वह भारत से नहीं खेलेगा। प्रायोजक, आईसीसी, श्रीलंका बोर्ड- सभी इस स्वर्ण अंडा देने वाले मैच से मुनाफा गंवाने की आशंका से चिंतित हो जाते हैं। आईसीसी पहुंचता है पाकिस्तान के दरवाजे। पाक बोर्ड खेलने को राजी होता है।
आखिरकार आज शाम वह शुभ घड़ी। कोलंबो में उतरेंगी दोनों टीमें। ‘टू शेक हैंड ऑर नॉट टू शेक, दैट इज द क्वेश्चन!’