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पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी, लेकिन कन्फ्यूजन बरकरार: ममता–अभिषेक का EC पर हमला, भाजपा का पलटवार

बंगाल वोटर लिस्ट विवाद गहराया: 10 लाख नाम आए, लाखों अब भी इंतजार में। कितने बाहर हुए-आंकड़े अब भी स्पष्ट नहीं।

By श्वेता सिंह

Mar 26, 2026 14:35 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट को लेकर जारी प्रक्रिया ने स्थिति को स्पष्ट करने के बजाय और उलझा दिया है। ‘अंडर एडजुडिकेशन’ वोटरों के लिए पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी होने के बाद भी यह साफ नहीं हो पाया है कि कितने लोगों को अंतिम रूप से वोट देने का अधिकार मिलेगा और कितने बाहर रह जाएंगे। इससे आम वोटरों के बीच असमंजस और चिंता दोनों बढ़ी है। चुनाव आयोग ने सोमवार देर रात पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट प्रकाशित की। शुरुआत में यह माना जा रहा था कि करीब 29 लाख वोटरों के दस्तावेजों के आधार पर यह सूची तैयार की गई है, लेकिन बाद में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल 10 लाख वोटरों के आधार पर ही पहली सूची जारी की गई है। दूसरी सूची शुक्रवार को जारी होने की संभावना जताई गई है।

राज्य में कुल 60 लाख से अधिक ‘अंडर ट्रायल’ वोटर हैं। इनमें से बुधवार तक लगभग 32 लाख लोगों के दस्तावेजों का निपटारा किया जा चुका था। हालांकि इन निपटाए गए मामलों में से कितनों को वैध माना गया और कितनों को बाहर कर दिया गया, इस पर कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सूत्रों के अनुसार, ज्यूडिशियल जांच में करीब 35 से 40 प्रतिशत मामलों में दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए। इसी आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि पहली सूची में शामिल 10 लाख में से लगभग 6 से 6.5 लाख लोगों को मतदान का अधिकार मिल सकता है, जबकि 3.5 से 4 लाख लोगों के नाम बाहर रह सकते हैं।

जमीनी स्तर पर स्थिति और भी चिंताजनक नजर आ रही है। मुर्शिदाबाद जिले के एक बूथ का उदाहरण बताता है कि अलग-अलग क्षेत्रों में परिणाम काफी असमान हैं। वहां 594 ‘अंडर ट्रायल’ वोटरों में से केवल 162 को ही सप्लीमेंट्री लिस्ट में जगह मिली, जबकि 432 लोगों के नाम बाहर हो गए। यानी करीब तीन-चौथाई लोग सूची से बाहर रह गए, जो औसत अनुमान से कहीं अधिक है।

इस पूरी प्रक्रिया के बीच आम वोटरों की चिंता के तीन प्रमुख कारण सामने आए हैं। पहला, अभी तक सभी बूथों पर सप्लीमेंट्री लिस्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। दूसरा, बड़ी संख्या में वोटरों के दस्तावेज अब भी लंबित हैं और उनके निपटारे की समयसीमा स्पष्ट नहीं है। तीसरा, जिन लोगों के नाम सूची से बाहर हुए हैं, उनके लिए अपील का विकल्प तो है, लेकिन जिलों में ट्रिब्यूनल की व्यवस्था अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं हुई है।

इस प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) के निर्देश पर हो रही है और सप्लीमेंट्री लिस्ट के प्रकाशन की जिम्मेदारी कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) को सौंपी गई है। ऐसे में आगे की कार्रवाई और अगली सूची कब और कैसे जारी होगी, यह काफी हद तक अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।

सप्लीमेंट्री लिस्ट के सामने आते ही राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने पूरे मामले पर सवाल उठाते हुए आंकड़ों को लेकर भ्रम फैलने की बात कही और प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर निशाना साधा। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि लोगों के नाम अचानक वेबसाइट से हटा दिए गए और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, उनके लिए कैंप लगाए जाएंगे और उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता दी जाएगी।

कुल मिलाकर, पहली सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी होने के बाद भी तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। लाखों वोटर अब भी यह नहीं जानते कि उनका नाम अंतिम सूची में रहेगा या नहीं। ऐसे में अब सबकी निगाहें अगली सूची और अदालत के अगले फैसलों पर टिकी हैं, जो इस पूरी प्रक्रिया की दिशा और विश्वसनीयता तय करेंगे।

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