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Assam Election: “असम में कांग्रेस को नहीं मिलेगा स्वदेशी वोट”- सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला

पहचान, घुसपैठ और विकास पर केंद्रित चुनाव। तीखी बयानबाजी से गरमाया सियासी माहौल।

By श्वेता सिंह

Mar 26, 2026 09:36 IST

गुवाहाटीः असम में विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए विपक्षी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में अब कोई भी “स्थानीय स्वदेशी भारतीय” कांग्रेस के पक्ष में मतदान नहीं करेगा।

सरमा ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में असम में व्यापक बदलाव आया है। उनके अनुसार, राज्य अब एक नई पहचान के साथ उभर रहा है, जहां विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को भी मजबूती मिली है। उन्होंने कहा, “आज का असम पहले जैसा नहीं रहा। हमने इसे पूरी तरह बदल दिया है और जनता इस बदलाव को महसूस कर रही है” । मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि राज्य में भाजपा के विरोध में खड़े लोग “सीमित वर्ग” से आते हैं, जबकि स्वदेशी समाज भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा है।

कांग्रेस पर तीखा प्रहार, बयान से बढ़ा राजनीतिक तापमान

सीएम सरमा ने कांग्रेस पर सीधा हमला करते हुए कहा कि पार्टी अब देश की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “कांग्रेस भारत में सरकार नहीं बना सकती, अगर कहीं बना सकती है तो वह पाकिस्तान या बांग्लादेश में ही होगी।”

उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। चुनावी माहौल में इस तरह की बयानबाजी को भाजपा के आक्रामक चुनावी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें विपक्ष को पूरी तरह घेरने की रणनीति दिखाई दे रही है।

चुनाव को बताया ‘अस्तित्व और पहचान की लड़ाई’

मुख्यमंत्री ने इस चुनाव को केवल सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि स्वदेशी समुदायों की पहचान और अस्तित्व से जुड़ी निर्णायक लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि असम के लोगों के लिए अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा सर्वोपरि है और यही इस चुनाव का मूल मुद्दा भी है।

भाजपा अपने अभियान में खासतौर पर घुसपैठ रोकने, सीमा सुरक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और तेज विकास को प्रमुख मुद्दों के रूप में प्रस्तुत कर रही है। सरमा का कहना है कि उनके नेतृत्व में राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

विपक्ष का पलटवार: ‘दो कांग्रेस विचारधाराओं का मुकाबला’

सीएम के बयान पर कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा कि असम की राजनीति में असली मुकाबला दो अलग-अलग विचारधाराओं के बीच है।

उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की विचारधारा है, जिसने राज्य को स्थिरता दी, जबकि दूसरी ओर “हिमंत बिस्वा सरमा की कांग्रेस” है, जो भाजपा के नाम पर काम कर रही है।

गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि भाजपा ने कांग्रेस की नीतियों और नेताओं को अपनाकर ही अपनी स्थिति मजबूत की है।

चुनाव कार्यक्रम: एक चरण में मतदान, कड़ी निगरानी

असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान होगा। मतगणना 4 मई को होगी और 6 मई तक पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।

राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 2.50 करोड़ है, जिनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है। चुनाव के लिए करीब 31,486 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

चुनाव आयोग ने निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। साथ ही, 9 अप्रैल से 29 अप्रैल तक एग्जिट पोल के प्रसारण पर रोक लगा दी गई है, ताकि मतदाताओं पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपनी पारंपरिक जलुकबारी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जो भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है।

भाजपा की तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश

पिछले विधानसभा चुनाव (2021) में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन ने 75 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी। भाजपा ने अकेले 60 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि उसके सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) को 9 और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) को 6 सीटें मिली थीं।

वहीं कांग्रेस और एआईयूडीएफ के गठबंधन को कुल 50 सीटें मिली थीं, जिसमें कांग्रेस ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

इस बार भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने के लक्ष्य के साथ चुनाव मैदान में है। दूसरी ओर कांग्रेस खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है, लेकिन पार्टी में हुए दलबदल और नेतृत्व की चुनौतियां उसके लिए मुश्किलें बढ़ा रही हैं।

मुख्य मुद्दे: विकास बनाम पहचान की राजनीति

इस बार असम चुनाव में जिन मुद्दों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें घुसपैठ, स्वदेशी पहचान, सांस्कृतिक संरक्षण, विकास और राजनीतिक ध्रुवीकरण शामिल हैं।

भाजपा जहां “नए असम” और विकास मॉडल को सामने रख रही है, वहीं कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई और शासन से जुड़े सवाल उठाकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

चुनावी मुकाबला हुआ दिलचस्प

असम में चुनावी जंग अब पूरी तरह तेज हो चुकी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के आक्रामक तेवर और कांग्रेस के पलटवार से साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुकाबला और ज्यादा रोचक और कांटे का होने वाला है।

राज्य की जनता किसके दावों पर भरोसा करती है, इसका फैसला 9 अप्रैल को ईवीएम में कैद होगा और 4 मई को नतीजों के साथ सामने आएगा।

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