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Bengal Election: “आदिवासियों को हक हमने दिए, BJP सिर्फ नाटक करती है”- नक्सलबाड़ी से ममता बनर्जी का आक्रामक हमला

चुनाव से पहले आदिवासी कार्ड पर TMC का फोकस, राम नवमी और वोटर लिस्ट मुद्दे पर भी साधा निशाना।

By श्वेता सिंह

Mar 26, 2026 10:25 IST

नक्सलबाड़ी/दार्जिलिंग: चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद चुनावी बिगुल फूंक चुका है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी हलचल भी तेज हो गई है। इसी क्रम में चुनावी प्रचार के दौरान एक बार फिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नक्सलबाड़ी से भाजपा पर जोरदार हमला बोला है। आदिवासी बहुल क्षेत्र में आयोजित जनसभा में ममता बनर्जी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने आदिवासी समुदाय को वास्तविक अधिकार दिए हैं, जबकि भाजपा (BJP) केवल “नाटक” करती है।

सीएम ममता बनर्जी ने स्पष्ट कहा, “हमने आदिवासियों को वन अधिकार दिए हैं। भाजपा पूरे देश में आदिवासियों पर अत्याचार करती है।” मुख्यमंत्री ने अपने कार्यों का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी सरकार ने बिरसा मुंडा के नाम पर कॉलेज बनवाया, उनकी प्रतिमा स्थापित की और आदिवासी समाज के सम्मान के लिए कई कदम उठाए।

नक्सलबाड़ी में संस्कृति से जुड़ाव, चुनावी संदेश साफ

अपने दौरे के दौरान ममता बनर्जी स्थानीय लोक नृत्य कार्यक्रम में भी शामिल हुईं। पारंपरिक नृत्य में उनकी भागीदारी को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह आदिवासी समाज के साथ जुड़ाव का सीधा संदेश देता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह दौरा आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है, जहां तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।

राम नवमी पर बयान: “राम सबके हैं, किसी की निजी संपत्ति नहीं”

जनसभा के दौरान ममता बनर्जी ने धार्मिक समावेशिता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भगवान राम किसी एक पार्टी या समूह के नहीं हैं। “राम आपकी संपत्ति नहीं हैं। राम सबके हैं। राम नवमी सबके लिए है,” उन्होंने कहा।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में राम नवमी को लेकर भाजपा बड़े स्तर पर कार्यक्रमों की तैयारी कर रही है और धार्मिक मुद्दों पर राजनीति तेज हो गई है।

वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग से जवाब तलब

ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि लोगों को सच्चाई जानने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जब तक इस मामले में न्याय नहीं मिलता, तब तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

गौरतलब है कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत राज्य में करीब 58 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि ये नाम मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट थे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस इसे पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बता रही है।

वन अधिकार और आदिवासी विकास पर जोर

ममता बनर्जी ने वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के तहत अपनी सरकार की उपलब्धियों को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य में आदिवासियों को जमीन और संसाधनों पर अधिकार दिलाने के लिए लगातार काम किया गया है।

देशभर में फरवरी 2026 तक FRA के तहत 54 लाख से अधिक दावे दर्ज हुए हैं, जिनमें से करीब 47 प्रतिशत को मंजूरी मिली है। पश्चिम बंगाल सरकार का दावा है कि उसने इस कानून को प्रभावी तरीके से लागू किया है। राज्य में आदिवासी विकास को बढ़ावा देने के लिए बिरसा मुंडा कॉलेज की स्थापना, उनकी जयंती पर अवकाश और बिरसा मुंडा तथा रघुनाथ मुर्मू के सम्मान में कई पहल की गई हैं।

इसके अलावा, पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में पांच नए सांस्कृतिक और विकास बोर्ड बनाने की घोषणा भी की गई है।

मोदी पर TMC का हमला, सियासी टकराव तेज

इसी बीच तृणमूल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी राष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल कर पश्चिम बंगाल और उसकी निर्वाचित सरकार को बदनाम कर रहे हैं। TMC का कहना है कि “डबल इंजन सरकार नफरत की राजनीति करती है, जबकि बंगाल की सरकार सम्मान और गरिमा के साथ काम करती है।”

आदिवासी वोट बैंक पर सीधी नजर

राज्य की राजनीति में आदिवासी और पिछड़ा वर्ग निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही इन वर्गों को अपने पक्ष में लाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं।

नक्सलबाड़ी से ममता बनर्जी का यह आक्रामक संदेश साफ संकेत देता है कि चुनावी जंग अब और तेज होने वाली है। एक ओर भाजपा धार्मिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है, तो दूसरी ओर तृणमूल स्थानीय पहचान, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों को सामने रख रही है।

चुनावी मुकाबला हुआ और दिलचस्प

पश्चिम बंगाल में चुनावी लड़ाई अब बहुआयामी हो चुकी है-आदिवासी अधिकार, धार्मिक पहचान, वोटर लिस्ट विवाद और विकास के मुद्दे एक साथ चुनावी विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं।

ममता बनर्जी के इस दौरे और उनके आक्रामक तेवरों ने साफ कर दिया है कि 2026 का चुनाव सिर्फ सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि राजनीतिक नैरेटिव की बड़ी लड़ाई बनने जा रहा है।

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