शिलांग : मेघालय में वाणिज्यिक LPG (रसोई गैस) की कमी का असर अब पर्यटन उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। अधिकारियों के अनुसार कई होटल और रेस्टोरेंट को अपने मेन्यू और सेवाओं में कटौती करनी पड़ रही है।
बताया गया है कि उपलब्ध LPG की आपूर्ति फिलहाल अस्पतालों और छात्रावासों जैसी आवश्यक सेवाओं में प्राथमिकता के आधार पर दी जा रही है। इसके कारण आतिथ्य क्षेत्र में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।
राजधानी शिलांग और सोहरा (पूर्व में चेरापूंजी) जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के होटल और रिसॉर्ट संचालकों का कहना है कि उन्हें अपने संचालन में बदलाव करना पड़ रहा है। कई जगह वैकल्पिक तरीकों से खाना पकाया जा रहा है।
सोहरा के एक लोकप्रिय रिसॉर्ट संचालक ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि वे अब लकड़ी और कोयले के जरिए धीमी आंच पर खाना बनाने की प्रक्रिया अपनाएंगे। साथ ही उन्होंने ग्राहकों से सीमित मेन्यू और अधिक प्रतीक्षा समय को लेकर सहयोग की अपील की। अब इन होटलों में बकायदा पुरानी परम्पराएं अपनाई जाएंगी।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस की कमी के कारण नियमित किचन संचालन प्रभावित हुआ है और कई स्थानों पर पूरा मेन्यू उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पा रहा है।
होटल फेडरेशन ऑफ शिलांग के अध्यक्ष पी. एस. साहदेव के अनुसार पिछले दो सप्ताह से गैस की आपूर्ति में कोई स्पष्ट सुधार नहीं हुआ है। अधिकांश होटल और रेस्टोरेंट इंडक्शन चूल्हों पर निर्भर हो गए हैं, जबकि तंदूर और चूल्हा जैसे पारंपरिक तरीकों का भी सहारा लिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई प्रतिष्ठानों के लिए पूरी तरह इंडक्शन पर शिफ्ट होना संभव नहीं है, क्योंकि बिजली आपूर्ति अनियमित है या स्वीकृत लोड पर्याप्त नहीं है।
स्थिति को देखते हुए अधिकांश होटलों ने अपने मेन्यू को सीमित कर दिया है। यदि यह समस्या बनी रहती है, तो गैस की बढ़ती लागत के कारण अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना भी जताई गई है।
साहदेव ने यह भी कहा कि क्षेत्र को कम से कम 20 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देना जरूरी है और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इससे पहले होटल फेडरेशन ने ईस्ट खासी हिल्स के उपायुक्त को पत्र लिखकर इस संकट के बीच पर्यटन गतिविधियों को बनाए रखने के लिए सहायता की मांग की थी। पर्यटन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार पिछले वर्ष इस पूर्वोत्तर राज्य में 16 लाख से अधिक पर्यटक आए थे।