नरेन्द्र मोदी
सोमनाथ-यह एक नाम ही ऐसा है, जिसका उच्चारण करते ही हर भारतीय के हृदय में गहरे गर्व और आध्यात्मिक चेतना का उदय होता है। सौराष्ट्र के प्रभास पाटन में स्थित यह भव्य मंदिर केवल एक स्थापत्य संरचना नहीं है, बल्कि भारत की अविनाशी आत्मा की शाश्वत घोषणा है। द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में जिस पहले नाम का उल्लेख मिलता है, वह है-“सौराष्ट्रे सोमनाथं च…”। इस पवित्र क्षेत्र में महादेव के दर्शन से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है-यह विश्वास सहस्राब्दियों पुराना है।
दुर्भाग्यवश श्रद्धा का यही केंद्र बार-बार विदेशी आक्रमणकारियों की क्रूरता का शिकार बना। जिनका उद्देश्य भक्ति नहीं, बल्कि केवल आतंक और विनाश था।
2026 का वर्ष सोमनाथ के इतिहास में एक विशिष्ट मोड़ है। आज से ठीक एक हज़ार वर्ष पहले 1026 ई. के जनवरी में सुल्तान महमूद ने इस मंदिर पर बर्बर आक्रमण किया था। उस आक्रमण का हर क्षण पीड़ा और नृशंसता से भरा था-भारत के मनोबल को तोड़ने का एक सुनियोजित प्रयास। लेकिन इतिहास साक्षी है कि सोमनाथ की पहचान उस विनाश तक सीमित नहीं रही। यह भारत माता के करोड़ों संतानों के अडिग साहस और पुनर्निर्माण के संकल्प से परिभाषित हुई है।
1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद ने सोमनाथ के दर्शन के बाद कहा था कि ऐसे मंदिर ही राष्ट्र का वास्तविक इतिहास सिखाते हैं। सैकड़ों आक्रमणों और सैकड़ों पुनरुत्थानों के चिह्न अपने भीतर समेटे हुए मलबे से बार-बार उठ खड़े होने का सर्वोत्तम उदाहरण है-सोमनाथ।
स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस लुप्त गौरव के पुनरुद्धार का दायित्व उठाया। 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में जब नए मंदिर के द्वार खुले, जो आधुनिक भारत की एक आध्यात्मिक विजय थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस आयोजन के प्रति विशेष रूप से उत्साहित नहीं थे किंतु डॉ. प्रसाद अपने निर्णय पर अडिग रहे। के. एम. मुंशी के शब्दों में सोमनाथ एक “शाश्वत पीठ” है।
भगवद्गीता के “नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि” मंत्र की भांति भारत की प्राणशक्ति अविनाशी है। आज जब भारत विश्व मंच पर विकास की नई दिशाएँ दिखा रहा है तब सोमनाथ की वही अदम्य चेतना हमारा पाथेय है। 1026 के आक्रमण के एक हज़ार वर्ष बाद आज हमारा संकल्प है-एक विकसित और गौरवशाली भारत का निर्माण।
श्री सोमनाथ महादेव के आशीर्वाद से हमारी यह विजय-यात्रा निरंतर चलती रहे।
जय सोमनाथ!
(लेखक: भारत के प्रधानमंत्री एवं श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष)