प्रीतम प्रतीक बसु
नयी दिल्लीः फिर पाकिस्तान की जमीन पर टार्गेटेड ऑपरेशन! इस बार खत्म किया गया भारत की मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शीर्ष पर रहे मोहम्मद कासिम गुज्जर को। हाल के दिनों में इस स्तर के किसी आतंकी की मौत की खबर नहीं आई थी।
भारतीय खुफिया एजेंसियों के हाथ एक वीडियो लगा है जिसकी सत्यता की पुष्टि एई समय ने नहीं की है। उसमें देखा जा रहा है कि एक मोटरसाइकिल पर सवार एक व्यक्ति सड़क के बाईं ओर जा रहा है। तभी पीछे से दूसरी बाइक पर आए अज्ञात हमलावर प्वाइंट ब्लैंक रेंज से संभवतः ग्लॉक 17 पिस्तौल से उसके सिर के पीछे गोली मारते हैं। वह व्यक्ति तुरंत जमीन पर गिर पड़ता है। खुफिया सूत्रों का दावा है कि यही व्यक्ति मोहम्मद कासिम गुज्जर उर्फ सुलेमान उर्फ सलमान था। 2024 के 7 मार्च को लोन टेररिस्ट के रूप में मोस्ट वांटेड सूची में उसका नाम केंद्रीय गृह मंत्रालय ने डाला था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसके सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
खुफिया सूत्रों के मुताबिक यह घटना पाकिस्तान के पेशावर शहर के बाहरी इलाके में 14 तारीख को हुई। गुज्जर लोन टेररिस्ट था यानी वह अकेले हमले अंजाम देता था लेकिन उसका लश्कर-ए-तैयबा से सीधा और करीबी संबंध था। पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह अज्ञात हमलावरों ने एक के बाद एक लश्कर नेताओं को मार गिराया है। किसी भी मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। हालांकि इस बार जिस तरह वीडियो सामने आया है, वैसा पहले नहीं हुआ था।
इससे पहले अबू कताल जो लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी था, अबू सैफुल्ला खालिद, अब्दुल रहमान, हाजीबुल्लाह उर्फ अदनान अहमद, अकरम गाजी और अबू कासिम जैसे लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष कमांडरों को भी इसी तरह अज्ञात बंदूकधारियों ने मार गिराया था। हर बार हमलावर अचानक प्रकट होकर ऑपरेशन को अंजाम देकर गायब हो गए। हमले के तरीके से साफ है कि आतंकियों की गतिविधियों की पहले से जानकारी हमलावरों के पास थी। केवल अबू कताल के मामले में लश्कर और पाक सेना के काफिले को भेदकर अंधेरे में उसकी हत्या की गई थी। हर मामले में प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली मारी गई।
खुफिया सूत्रों के अनुसार गुज्जर को भी इसी तरीके से मारा गया। जिस स्थान पर उसे निशाना बनाया गया वह सुनसान सड़क थी। हमले के समय उसके आसपास कोई नहीं था। हालांकि एक अन्य सूत्र का दावा है कि उसके साथ दूसरी बाइक पर उसका एक साथी भी था, जिसे भी हमलावरों ने मार दिया।
गुज्जर लोन टेररिस्ट था। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक वह सीधे किसी एक आतंकी संगठन के लिए काम नहीं करता था बल्कि उसका काम कॉन्ट्रैक्ट आधारित था। हमले करना, भर्ती कराना और अन्य गतिविधियां वह अलग-अलग संगठनों के लिए करता था। वह लश्कर के लिए मैदान में उतरकर और सोशल मीडिया के जरिए भर्ती का बड़ा जिम्मा संभाल रहा था।
43 वर्षीय गुज्जर का जन्म जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के आंगरल्ला गांव में हुआ था। 2002 में उसका संपर्क आतंकियों से हुआ। 2009 में वह सीमा पार कर पाक अधिकृत कश्मीर में लश्कर के प्रशिक्षण शिविर में गया। 2019 में धारा 370 हटने के बाद वह फिर कश्मीर लौटा और कई हमलों में शामिल हुआ। खुफिया एजेंसियों के अनुसार उसी समय से वह लोन वुल्फ के रूप में काम करने लगा।
13 अगस्त 2021 को राजौरी जिले के खांडली चौक में स्थानीय भाजपा नेता जसबीर सिंह को निशाना बनाकर ग्रेनेड हमला किया गया जिसमें उनके भतीजे की मौत हुई। 21 जनवरी 2023 को जम्मू के नरवाल इलाके में दोहरे विस्फोट में भी उसका नाम सामने आया। 13 मई 2022 को वैष्णो देवी तीर्थयात्रियों पर हमला उसका सबसे बड़ा ऑपरेशन माना जाता है। बस पर स्टिकी बम से विस्फोट कर आग लगा दी गई, जिसमें चार तीर्थयात्रियों की मौत और 20 से अधिक घायल हुए। इस हमले की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर फ्रीडम फाइटर्स नामक संगठन ने ली।
9 जून 2024 को रियासी के तेरायथ गांव के पास शिवखोरी मंदिर के नजदीक कटरा जा रही एक और बस पर हमला हुआ जिसमें 9 लोग मारे गए और 33 घायल हुए। खुफिया सूत्रों के अनुसार इस हमले की योजना में भी गुज्जर की बड़ी भूमिका थी। 2025 की शुरुआत में उसके फिर से पाकिस्तान भाग जाने की आशंका जताई गई थी। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि गुज्जर जरूरत के अनुसार अपनी टीम तैयार कर लेता था। रिक्रूटर होने के कारण उसके पास अच्छा नेटवर्क था। ओवर ग्राउंड वर्कर नेटवर्क की मदद से उसे लॉजिस्टिक समर्थन मिलता था। बताया जाता है कि उसने रियासी के कम से कम 50 किशोरों और युवाओं को जिहाद के लिए प्रेरित कर पीओके के प्रशिक्षण शिविरों में भेजा था। लश्कर और जैश सहित कई संगठनों के शीर्ष नेतृत्व से उसके संपर्क थे। ऐसे मोस्ट वांटेड आतंकी को पेशावर में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया, ऐसा खुफिया सूत्रों का दावा है।