नयी दिल्लीः राष्ट्रपति के बंगाल दौरे के बाद प्रोटोकॉल विवाद बढ़ता ही जा रहा है। टीएमसी सांसद सौगत राय (Saugata Roy) ने संसद परिसर में पत्रकारों से कहा कि पार्टी ने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। पार्टी चाहती है कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी सीधे उन्हें दी जा सके। इसके लिए राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन (Derek O'Brien) ने 9 मार्च को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर 12 से 15 सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात का अनुरोध किया था। हालांकि पार्टी का दावा है कि अब तक इस अनुरोध पर कोई जवाब नहीं मिला है।
प्रोटोकॉल विवाद को तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राजनीतिक साजिश करार देते हुए खारिज किया है। इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह कार्यक्रम राज्य सरकार द्वारा आयोजित नहीं किया गया था और उस समय वह जनता के अधिकारों को लेकर आयोजित एक धरना कार्यक्रम में शामिल थीं। इधर राष्ट्रपति को लिखे गये पत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए राज्य सरकार की योजनाओं और पहलों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। इसमें बुनियादी ढांचा विकास, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम और शिक्षा से जुड़ी पहल को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में बताया गया है।
पश्चिम बंगाल की हालिया राजनीतिक बहस की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) की 7 मार्च 2026 को हुई राज्य यात्रा के बाद हुई। इस दौरान वह सिलीगुड़ी के पास गौसाइंपुर में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल हुई थीं। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल को अंतिम समय में बदल दिया गया था और इसे दूर-दराज के इलाके में आयोजित किया गया, जिसके कारण संथाल समुदाय के कई लोग इसमें शामिल नहीं हो सके।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और राज्य सरकार के कई मंत्री कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे। हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी को अपनी “छोटी बहन” बताते हुए यह भी पूछा कि क्या उनके बीच किसी तरह की नाराजगी है।
इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति की सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़े “ब्लू बुक” नियमों के संभावित उल्लंघन को लेकर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट में एयरपोर्ट पर स्वागत की व्यवस्था, वॉशरूम में पानी की कमी और मार्ग पर गंदगी जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया।
भाजपा का हमला और राजनीतिक टकराव
इस पूरे विवाद को लेकर भाजपा ने पश्चिम बंगाल सरकार की कड़ी आलोचना की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में टीएमसी सरकार पर राष्ट्रपति के प्रति “गंभीर अनादर” दिखाने का आरोप लगाया।
वहीं केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा (JP Nadda) ने कहा कि एक महिला मुख्यमंत्री द्वारा आदिवासी समुदाय से आने वाली महिला राष्ट्रपति का अपमान किया गया है।
इस मुद्दे ने केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। टीएमसी इसे विपक्ष का राजनीतिक हमला बता रही है, जबकि भाजपा इसे संवैधानिक पद की गरिमा से जोड़कर सवाल उठा रही है।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ने इस मामले में केंद्र को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, हालांकि राज्य के मुख्य सचिव ने रिपोर्ट जमा करने के लिए कुछ अतिरिक्त समय भी मांगा था।
आदिवासी कल्याण योजनाओं पर जोर
टीएमसी का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार आदिवासी और वंचित वर्गों के विकास के लिए कई योजनाएं चला रही है। राज्य की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता दी जाती है। वर्ष 2026 में इस सहायता राशि को बढ़ाकर सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए 1500 रुपये और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए 1700 रुपये कर दिया गया है। इस योजना से करीब 2.41 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य साथी स्वास्थ्य योजना के तहत लगभग 2.42 करोड़ महिलाओं को स्मार्ट कार्ड जारी किए गए हैं।
हाल ही में शुरू की गई युवा साथी योजना के तहत 21 से 40 वर्ष के बेरोजगार युवाओं, जो कम से कम माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण हैं, को प्रति माह 1500 रुपये का भत्ता दिया जा रहा है। इस योजना के लिए लगभग एक करोड़ आवेदन प्राप्त होने का दावा किया गया है।
राज्य सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य आदिवासी, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना है।
अब नजर राष्ट्रपति भवन के फैसले पर
प्रोटोकॉल विवाद के बीच टीएमसी द्वारा राष्ट्रपति से मुलाकात की मांग ने इस पूरे मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। पार्टी का कहना है कि वह राष्ट्रपति के सामने राज्य सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को रखना चाहती है।
अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी है कि राष्ट्रपति भवन टीएमसी के प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात का समय देता है या नहीं, क्योंकि यह विवाद पहले ही राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन चुका है।