नयी दिल्लीः पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की स्थिति के बीच फंसे यात्रियों के लिए भारत सरकार विशेष उड़ानों की व्यवस्था कर रही है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बताया है कि 4 मार्च को भारत से पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों के लिए कुल 58 उड़ानें भेजी जाएंगी। इनमें इंडिगो 30 उड़ानें संचालित करेगा, जबकि एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस मिलकर 23 उड़ानें चलाएंगे।
युद्ध के माहौल में अलग-अलग स्थानों पर फंसे यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह समय-सारिणी तैयार की गई है। साथ ही स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नई दिल्ली विदेशी एयरलाइंस कंपनियों के साथ भी लगातार संपर्क बनाए हुए है।
वैकल्पिक मार्ग से उड़ानें और टिकट कीमतों पर नजर
युद्ध जैसी स्थिति के कारण कई देशों का हवाई क्षेत्र फिलहाल बंद कर दिया गया है। इसलिए भारतीय विमान कंपनियां अब वैकल्पिक मार्गों से गंतव्य तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जिससे यात्रा का समय बढ़ रहा है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कहा है कि वह स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहा है, ताकि संकट का फायदा उठाकर हवाई टिकटों की कीमतें असामान्य रूप से न बढ़ाई जाएं।
पिछले 24 घंटों में एमिरेट्स और एतिहाद एयरवेज ने भी खाड़ी क्षेत्र से 9 उड़ानें संचालित की हैं। फंसे हुए पर्यटकों और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाना फिलहाल सरकार का मुख्य लक्ष्य है।
सैकड़ों उड़ानें रद्द, एयरलाइंस सतर्क
पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण पिछले कुछ दिनों में हवाई यातायात पर भारी असर पड़ा है। सूत्रों के अनुसार 28 फरवरी से अब तक भारतीय एयरलाइंस की लगभग 1,221 उड़ानें और विदेशी कंपनियों की 388 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं।
सिर्फ पिछले तीन दिनों में ही 1,117 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुई हैं। एयर इंडिया ने एक बयान में कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इज़राइल और कतर के लिए अधिकांश उड़ान सेवाएं 4 मार्च की मध्यरात्रि तक स्थगित रखी गई हैं।
यात्रियों की परेशानी रोकने के लिए कड़े निर्देश
उड़ानें रद्द होने से प्रभावित यात्रियों की मदद के लिए केंद्र सरकार ने एयरलाइंस को विशेष निर्देश दिए हैं। टिकट रिफंड और दोबारा बुकिंग में पारदर्शिता बनाए रखने को कहा गया है।
यात्रियों को सही जानकारी और सहायता मिले, इसके लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय हवाई अड्डा प्राधिकरण और विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय में काम कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र की वर्तमान स्थिति का आकलन करने के बाद ही आगे की उड़ानों पर निर्णय लिया जाएगा।