🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

मुंबई से दुबई जा रही फ्लाइट को मिली मिसाइल हमले की चेतावनी, पायलट ने विमान का करवाया 'डबल रिवर्स'

आखिर डबल रिवर्स है क्या? क्यों जानकार इसे विरल घटना करार दे रहे हैं?

By Moumita Bhattacharya

Mar 04, 2026 01:48 IST

पश्चिम एशिया में दिन प्रतिदिन युद्ध की स्थिति गंभीर होती जा रही है। कब कहां मिसाइल का हमला हो जाए, इस बात का अंदाजा कोई नहीं लगा पा रहा है। ऐसी परिस्थिति में फ्लाइट्स से आना-जाना यानी जान हथेली पर लेकर चलने के जैसा है। मंगलवार को मुंबई से दुबई के लिए एमिरेट्स की एक उड़ान रवाना हुई।

जब विमान आकाश में था, उसी समय अचानक मिसाइल हमले की चेतावनी जारी की गयी। बचने का कोई उपाय न देखकर पायलट ने विमान को 'डबल रिवर्स' करवा दिया। पर आखिर डबल रिवर्स है क्या? क्यों जानकार इसे विरल घटना करार दे रहे हैं?

मिली जानकारी के अनुसार मुंबई से दुबई के लिए एमिरेट्स एयरलाइंस की फ्लाइट संख्या EK501 ने उड़ान भरी थी। विमान जैसे ही संयुक्त अरब अमीरात की आकाशीय सीमा में प्रवेश करने वाला था उसी समय एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से पायलट को चेतावनी वाला संदेश भेजा गया। इस चेतावनी संदेश में कहा गया था कि ईरान विमान पर मिसाइल से हमला कर सकता है।

उन्हें रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम को शुरू किया गया है। इसलिए संयुक्त अरब अमीरात की आकाशीय सीमा में प्रवेश करना अभी खतरनाक साबित हो सकता है। इसके बाद पायलट ने जो किया वह किसी को भी चौंका सकता है।

बताया जाता है कि फ्लाइट के पायलट को जैसे ही ATC का यह संदेश मिला, वह तुरंत मुंबई की ओर फिर से मुड़ गया। लेकिन विमान मुंबई की ओर नहीं लौटा बल्कि आकाश में ही गोलाकार या अंडाकार में चक्कर लगाने लगा और इंतजार करने लगा। पर किस बात का इंतजार? पायलट को ATC के संदेश का इंतजार था जिसमें उससे यह कहा जाएगा कि खतरा टल गया है। हुआ भी ऐसा ही।

कुछ देर बाद ATC से दोबारा संदेश आया कि खतरा टल गया है। इसके बाद फिर से फ्लाइट को अपने गंतव्य की ओर मोड़ा गया। इस पद्धति को डबल रिवर्स पद्धति कहा जाता है। इस पद्धति में कभी विमान सीधी तो कभी घुमकर दूसरे रास्ते से होकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ती है।

बताया जाता है कि फाइनल क्लियरेंस मिलने के बाद एमिरेट्स की विमान दुबई एयरपोर्ट पर सुरक्षित रूप से लैंड कर चुकी है। सभी यात्री भी सुरक्षित बताए जाते हैं लेकिन फ्लाइट को दो बार अपनी दिशा में परिवर्तन करना पड़ा। इस वजह से उसका काफी ईंधन भी जल गया और समय भी काफी ज्यादा लगा।

इसके साथ ही ATC के साथ पायलट को तालमेल बैठाने की भी बहुत जरूरत होती है। इस वजह से आमतौर पर फ्लाइट्स में पायलट डबल रिवर्स पद्धति को टालने की कोशिश ही करते हैं। इसी वजह से इसे विरल भी कहा जाता है।

Prev Article
भाजपा ने गांधी-वाड्रा परिवार पर 7 करोड़ रुपये की वसूली की कोशिश का आरोप लगाया, व्हाट्सऐप चैट को बताया सबूत

Articles you may like: