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‘गले पर तलवार रखकर दिल नहीं जीते जा सकते’-सोमनाथ मंदिर से पीएम मोदी का संदेश

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि सोमनाथ के इतिहास को दबाकर रखा गया। इसी कड़ी में उन्होंने विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

By कौशिक भट्टाचार्य, Posted by डॉ.अभिज्ञात

Jan 11, 2026 15:25 IST

सोमनाथ (गुजरात): क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धर्म और राष्ट्रवाद को एक साथ जोड़ दिया? क्या उन्होंने हिंदुत्व की राजनीति को और धार दी? रविवार को सोमनाथ मंदिर में खड़े होकर प्रधानमंत्री ने सीधे शब्दों में कहा, “औरंगज़ेब सोमनाथ मंदिर को मस्जिद बनाना चाहता था। गले पर तलवार रखकर दिल नहीं जीते जा सकते।”

इसी संदर्भ में उन्होंने आरोप लगाया कि असली इतिहास को भुलाने की कोशिश की गई और विपक्ष पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का भी आरोप लगाया।

प्रधानमंत्री शनिवार को तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर पहुंचे। सबसे पहले वे सोमनाथ आए। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माने जाने वाले इस मंदिर के एक हजार वर्ष पूरे होने के अवसर पर रविवार से ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ की शुरुआत हुई। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने 108 घोड़ों के साथ निकाली गई शौर्य यात्रा में हिस्सा लिया और दोनों हाथों से डमरू भी बजाया। इसके बाद उन्होंने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और फिर सद्भावना मैदान पहुंचे।

सद्भावना मैदान में प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए हजारों लोग पहले से मौजूद थे। अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने सोमनाथ पर हुए बार-बार के हमलों और मंदिर के पुनर्निर्माण की कहानी का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा, “हमारे वीरों के इतिहास को मिटाने की कोशिश की गई। हमें यह पढ़ाया गया कि लूट के लिए ही सोमनाथ मंदिर पर हमले हुए थे लेकिन असली इतिहास कुछ और है, जिसे छिपाकर रखा गया।”

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने बार-बार ‘धार्मिक कट्टरता’ और ‘कट्टर उन्माद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “जिन्होंने हमला किया, वे इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए, लेकिन सोमनाथ आज भी गर्व के साथ सिर उठाकर खड़ा है।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश आज़ाद होने के बावजूद गुलामी की मानसिकता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। उन्होंने सोमनाथ को ‘राष्ट्रीय गौरव’ बताते हुए कहा, “आज़ादी के बाद सोमनाथ के पुनर्निर्माण को देश के कई बड़े नेताओं का समर्थन मिला, लेकिन उन्हें रोकने की कोशिशें भी कम नहीं हुईं। सरदार वल्लभभाई पटेल को रोकने की कोशिश की गई और तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की यहां यात्रा पर भी आपत्तियां जताई गईं।”

प्रधानमंत्री ने एकजुट रहने का संदेश देते हुए कहा कि जो ताकतें सोमनाथ के पुनर्निर्माण के खिलाफ थीं, वे आज भी सक्रिय हैं। उन्होंने कहा, “देश के खिलाफ साज़िशें रची जा रही हैं। इसलिए हमें एकजुट और सतर्क रहना होगा।”

अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने गुजरात के विकास का ज़िक्र किया और भारत के दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ने की बात भी कही।

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