नयी दिल्लीः रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति और कीमतों को लेकर जारी विवाद शुक्रवार को संसद तक पहुंच गया। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने विरोध कर रहे सदस्यों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल को बाधित करना उचित नहीं है। संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है-चाहे वह सदन के भीतर हो या बाहर।
प्रश्नकाल बाधित होने पर स्पीकर की नाराजगी
जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने एलपीजी आपूर्ति और कीमतों के मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल संसद की कार्यवाही का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां सांसद अपने क्षेत्रों और राष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि हर सदस्य को अपने प्रश्न पूछने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने विरोध कर रहे सांसदों से कहा कि उनका व्यवहार सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है। स्पीकर ने यह भी टिप्पणी की कि विपक्ष अक्सर यह शिकायत करता है कि उसे अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिलता, लेकिन जब प्रश्नकाल होता है तो वही उसे चलने नहीं देता।
सदन की कार्यवाही शुरू होने के लगभग तीन मिनट के भीतर ही लगातार हंगामे को देखते हुए स्पीकर ने कहा कि अगर विपक्ष सदन नहीं चलने देना चाहता, तो कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की जाती है।
ऊर्जा आपूर्ति पर वैश्विक संकट का असर
इस बीच भारत में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। विशेष रूप से होरमुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव पड़ा है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। देश को मिलने वाले लगभग 5.8 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा इसी मार्ग से आता है। इसके अलावा देश की लगभग 55 प्रतिशत एलपीजी और करीब 30 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति भी इसी रास्ते से होती है।
इस स्थिति को देखते हुए तेल कंपनियों ने घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। इसके कारण होटल, रेस्टोरेंट और अन्य वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं के लिए गैस की आपूर्ति में कटौती की गई है।
वैकल्पिक ईंधन का सहारा
ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव को देखते हुए भारत ने अस्थायी तौर पर घरेलू उपयोग के लिए केरोसिन की आपूर्ति फिर से शुरू की है। वहीं होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए कोयले के उपयोग की अनुमति दी गई है, ताकि रसोई गैस की उपलब्धता आम घरों के लिए सुनिश्चित की जा सके। ऊर्जा क्षेत्र में इस अस्थायी व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि वैश्विक संकट के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना न करना पड़े।