नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर असाधारण साहस और बलिदान के लिए 70 सशस्त्र बल कर्मियों को वीरता पुरस्कार देने की मंजूरी दी। इस सूची में छह मरणोपरांत सम्मान शामिल हैं। पुरस्कार पाने वालों में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ तथा थलसेना, नौसेना और वायुसेना के कई अन्य अधिकारी और जवान शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बनकर इतिहास रचने वाले ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया जाएगा।
शुभांशु शुक्ला का जन्म लखनऊ में राकेश शर्मा के भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बनने के लगभग 18 महीने बाद हुआ था। चार दशक बाद भारतीय वायुसेना के इस फाइटर पायलट ने तिरंगे को एक बार फिर अंतरिक्ष तक पहुंचाकर इतिहास रच दिया। पिछले वर्ष जून में शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा करने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने।
10 अक्टूबर 1985 को लखनऊ में जन्मे शुक्ला बचपन में संकोची और अंतर्मुखी स्वभाव के थे और अपने बाल्यकाल में उन्होंने 1984 की राकेश शर्मा की अंतरिक्ष उड़ान की कहानियां सुनी थीं। शुक्ला की लगभग 20 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा वर्ष 2025 में हुई, जो अप्रैल 1984 में रूसी सोयुज यान से अंतरिक्ष गए कॉस्मोनॉट राकेश शर्मा की उड़ान के 41 वर्ष बाद थी। अब वे पहले जैसे संकोची लड़के नहीं रहे। शुक्ला आज विभिन्न कार्यक्रमों में प्रेरक भाषण देते हैं, मीडिया के सवालों का आत्मविश्वास से सामना करते हैं और उन्हें मिलने वाली सराहना का आनंद लेते हैं।