नयी दिल्लीः क्या भारत वास्तव में रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर रहा है? यह सवाल उस समय चर्चा में आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि नई दिल्ली ने मॉस्को से तेल आयात रोकने का फैसला किया है। हालांकि, भारत सरकार ने अब तक इस बारे में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इसी बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रूसी संसद के निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ में ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप के अलावा किसी ने यह नहीं कहा है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या किसी अन्य भारतीय मंत्री से ऐसा कोई बयान नहीं सुना है।”
लावरोव ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि “सिर्फ ट्रंप ही दुनिया भर में यह कह रहे हैं।” उन्होंने पिछले दिसंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे और द्विपक्षीय संबंध मजबूत बने हुए हैं।
दरअसल, ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। उनका तर्क था कि रूस भारत को तेल बेचकर जो राजस्व कमा रहा है, उसका उपयोग यूक्रेन युद्ध में कर रहा है। इस कदम से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया।
हालांकि बाद में ट्रंप ने 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ वापस लेने के लिए एक घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद भारतीय सामानों पर टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत रह गया।
ट्रंप ने एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा करते समय यह भी दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे रूस से तेल आयात रोकने का वादा किया है। वहीं, नई दिल्ली पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के अनुसार तय करेगा कि तेल कहां से खरीदा जाए।
इस मुद्दे को रूसी संसद में एक सांसद ने भी उठाया था, जिसके जवाब में लावरोव ने दोहराया कि भारत-रूस समझौते पर किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा।
इस वर्ष भारत में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होना है, जिसमें राष्ट्रपति पुतिन के शामिल होने की योजना है। लावरोव ने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक और बैठक होगी। दरअसल रूस इस रिश्ते को उतना आगे ले जाने के लिए तैयार है, जितना भारत चाहता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में मॉस्को और नई दिल्ली के संबंध और मजबूत होंगे।