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पूरी दुनिया को कठपुतली समझ बैठे थे, आखिर एक खिलौना कंपनी के हाथों ही मात खा गए ट्रंप- कैसे?

ट्रंप के टैरिफ की घोषणा के तुरंत बाद ही रिक वोल्डेनबर्ग वकील की तलाश में निकल पड़े थे। यह कंपनी उनकी मां ने शुरू की थी। खून-पसीना बहाकर उन्होंने इसे बड़ा किया था। वे ट्रंप को इसे ‘छीनने’ नहीं देने वाले थे।

By कौशिक भट्टाचार्य, Posted by डॉ.अभिज्ञात

Feb 21, 2026 16:07 IST

वाशिंगटनः कुछ दिन पहले तक ‘लर्निंग रिसोर्सेज’ कंपनी का नाम गिने-चुने लोग ही जानते थे और अब? पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ पहला मुकदमा इसी कंपनी ने दायर किया था। लर्निंग रिसोर्सेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिक वोल्डेनबर्ग ने कहा था, “तिल-तिल करके कंपनी खड़ी की है। इसे कोई राजनेता बर्बाद कर दे, यह मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा।”

टैरिफ की कहानी

यह अप्रैल 2024 की बात है। अचानक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50 से अधिक देशों पर टैरिफ लगा दिया। व्हाइट हाउस से उत्साहपूर्वक घोषणा की गई, “यह अमेरिका का नया स्वतंत्रता दिवस है।” ट्रंप का दावा था कि इससे व्यापार घाटा कम होगा और सरकारी आय बढ़ेगी।

रिक की कंपनी का पलटवार

टैरिफ युद्ध में ट्रंप ने पूरी दुनिया को जैसे कठपुतली समझ लिया था। लेकिन रिक की खिलौना कंपनी ने उन्हें करारा जवाब दिया। लर्निंग रिसोर्सेज सिर्फ खिलौने नहीं बनाती, बल्कि खेल-खेल में बच्चों को सिखाने का काम करती है। यह कंपनी रिक की मां ने शुरू की थी और उन्होंने अथक मेहनत से इसे आगे बढ़ाया।

कंपनी का मुख्यालय इलिनॉय में है और अधिकतर सामान चीन से आयात किया जाता है। टैरिफ लगने से कंपनी पर भारी असर पड़ा। रिक ने कहा, “सिर्फ हम ही नहीं, अमेरिका के कई व्यवसाय आयात पर निर्भर हैं। टैरिफ ने उन्हें बुरी तरह प्रभावित किया है।”

अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम और कानूनी लड़ाई

1977 के ‘अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम’ के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ आपात आर्थिक अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन क्या टैरिफ लगाना उसी अधिकार के दायरे में आता है? ट्रंप की घोषणा के अगले ही दिन रिक वोल्डेनबर्ग वकीलों से संपर्क में जुट गए। ‘एकिन गम्प’ नामक विधि फर्म के वकील उनकी मदद के लिए आगे आए। निचली अदालत में ‘लर्निंग रिसोर्सेज बनाम ट्रंप’ नाम से मामला दायर हुआ।

अदालत में एक के बाद एक झटके

पहले निचली अदालत में ट्रंप को झटका लगा। अदालत ने उनके टैरिफ को अवैध करार दिया। मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। वहां भी निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा गया। प्रधान न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा, “टैरिफ लगाने के मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी शक्तियों की सीमा से आगे बढ़ गए।” अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे फैसले के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है, जो ट्रंप ने नहीं ली थी।

‘पैसा वापस करो’

अब रिक वोल्डेनबर्ग टैरिफ के रूप में दी गई राशि की वापसी चाहते हैं। उन्होंने कहा, “इन महीनों में हमने टैरिफ के नाम पर जितना भुगतान किया है, वह सब वापस चाहिए।” उनका कहना है कि जिस तरह हर साल कर-वापसी दी जाती है, उसी तरह यह पैसा भी लौटाया जाना चाहिए।

‘व्यवसाय को भारी नुकसान’

रिक का दावा है कि टैरिफ के कारण पिछले वर्ष उनके व्यवसाय को भारी नुकसान हुआ। ट्रंप का कहना था कि विनिर्माण क्षेत्र को अमेरिका में वापस लाना जरूरी है। लेकिन रिक का कहना है, “रातोंरात आपूर्ति श्रृंखला तोड़ देना समझदारी नहीं है। हमारे ऊपर जैसे आसमान टूट पड़ा था।”

उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “अब समय है यह सोचने का कि क्या जरूरी है और क्या नहीं।”

क्या ट्रंप ने कुछ सीखा?

ट्रंप ने पूरी दुनिया को जैसे खिलौना समझ लिया था। लेकिन एक खिलौना कंपनी से ही उन्हें कड़ी चुनौती मिलेगी, शायद उन्होंने सोचा भी नहीं था। कई लोगों के मुताबिक यह घटना एक प्रतीक की तरह है। यह बताती है कि असीम शक्ति का दावा हमेशा टिकाऊ नहीं होता।

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