ढाकाः प्रधानमंत्री पद संभालने के तीन दिन के भीतर ही तारिक हुसैन ने बड़ा कदम उठाया और ढाका में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को फिर से चालू कर दिया। शुक्रवार से ही बांग्लादेश हाई कमीशन ने दिल्ली में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा जारी करना शुरू कर दिया। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम भारत के साथ संबंधों को सामान्य करने का संकेत है। बीते साल अगस्त में शेख हसीना के कार्यकाल के समाप्त होने के बाद मो. यूनुस की नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार आई। इसके बाद से ही भारत-बांग्लादेश संबंधों में गिरावट शुरू हो गई थी। स्थिति और बिगड़ गई जब छात्र नेता उसमान हादीर की मृत्यु के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए। साथ ही, अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ लगातार अत्याचार की घटनाएं सामने आईं। तब बांग्लादेश ने सुरक्षा और कूटनीतिक तनाव का हवाला देते हुए कंसुलर और वीजा सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया।
भारत में वीजा आवेदन केंद्रों को भी धीरे-धीरे बंद किया गया। बाद में कुछ आंशिक सेवाएं शुरू हुईं, लेकिन वीजा जारी होना बहुत कम हुआ। हाल ही में हुए आम चुनाव में बीएनपी ने भारी मतों से जीत हासिल की। इसके बाद तारिक हुसैन प्रधानमंत्री बने और धीरे-धीरे वीजा सेवाओं को बहाल करने की प्रक्रिया शुरू की। सबसे पहले व्यापार और रोजगार से जुड़ी वीजा सेवाएं चालू हुईं। अब प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद चिकित्सा, पर्यटन और अन्य सभी प्रकार के वीजा सेवाओं को भी चालू कर दिया गया है। इससे भारतीय नागरिकों के लिए बांग्लादेश यात्रा आसान हो गई है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की दिशा में पहला बड़ा सकारात्मक संकेत है।
भारत ने भी इसके जवाब में संकेत दिए हैं कि वह जल्द ही बांग्लादेश के नागरिकों के लिए सभी प्रकार के वीजा सेवाएं पूरी तरह चालू करेगा। सिलीट में एक कार्यक्रम में भारतीय कंसुलर अधिकारी अनिरुद्ध दास ने कहा कि फिलहाल मेडिकल और डबल एंट्री वीजा को प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन अन्य वीजा भी जल्दी चालू होंगे। तारिक हुसैन का यह कदम केवल वीजा सेवा तक सीमित नहीं है। उनके शपथ ग्रहण समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया था, हालांकि मोदी उपस्थित नहीं हो सके। प्रतिनिधि के तौर पर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ढाका गए थे और तारिक को भारत आने का न्योता दिया।
अब कूटनीतिक विशेषज्ञ यह उम्मीद कर रहे हैं कि तारिक हुसैन का पहला विदेश दौरा नई दिल्ली हो सकता है, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को नया आयाम देगा। इस बदलाव के साथ यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। व्यापार, पर्यटन, चिकित्सा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कूटनीतिक संपर्क और यात्राएं अब आसानी से संभव होंगी।