ढाका: एक ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव के तहत बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने मंगलवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। यह समारोह बीएनपी के दो दशक लंबे सत्ता से बाहर रहने के दौर के अंत का प्रतीक बना। राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन ने लगभग शाम सवा चार बजे उन्हें पद की शपथ दिलाई। ढाका में आयोजित इस उच्च-प्रोफ़ाइल समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया, जो इस सत्ता परिवर्तन के क्षेत्रीय महत्व को रेखांकित करता है।
यह ऐतिहासिक कार्यक्रम नेशनल पार्लियामेंट भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित किया गया, जहां औपचारिक कार्यवाही के बाद राष्ट्रपति और नए प्रधानमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से हाथ मिलाया।
प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार बीएनपी की सत्ता में वापसी 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव में मिली “पूर्ण बहुमत की जीत” के बाद संभव हुई। इससे पहले पार्टी वर्ष 2001 से 2006 तक सत्ता में रही थी।
नवगठित मंत्रिमंडल में नए चेहरों की उल्लेखनीय भागीदारी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 17 मंत्री और 24 राज्य मंत्री ऐसे हैं, जिन्होंने पहले कभी इस प्रकार का पद नहीं संभाला।
व्यक्तिगत राजनीतिक करियर में भी यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि प्रधानमंत्री तारिक रहमान पहली बार मंत्रिमंडल के सदस्य बने हैं। अपनी पार्टी के पिछले कार्यकालों के दौरान उन्होंने कोई सार्वजनिक पद नहीं संभाला था।
प्रोथोम आलो ने सत्ता परिवर्तन के दौरान व्यापक जनभागीदारी का भी उल्लेख किया। दोपहर से ही बीएनपी के विभिन्न संगठनों के नेता और कार्यकर्ता और देशभर से आए नागरिक राजधानी में एकत्र होने लगे। दोपहर ढाई बजे तक मणिक मिया एवेन्यू समर्थकों और नारों से गूंज उठा, जहां लोग मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह के साक्षी बनने के लिए जुटे थे।
सत्ता परिवर्तन एक बड़े राजनीतिक उथल-पुथल के बाद हुआ है। पर्यवेक्षकों के अनुसार 2024 के छात्र-जन आंदोलन के बाद अवामी लीग सरकार के पतन के साथ यह नई यात्रा शुरू हुई। पिछले पंद्रह वर्षों से खुद को उत्पीड़न और यातना का शिकार बताने वाली बीएनपी ने प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत पिछले गुरुवार को हुए चुनाव में भाग लिया। पार्टी और पर्यवेक्षकों ने इन चुनावों को उत्सवपूर्ण, निष्पक्ष और स्वीकार्य बताया है।
अपने पहले संबोधन में प्रधानमंत्री रहमान ने मेल-मिलाप की भावना पर जोर दिया। उन्होंने मतभेदों को दूर कर राष्ट्रीय एकता स्थापित करने का विशेष संदेश दिया और राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिरता, कानून का शासन तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया।
प्रोथोम आलो के अनुसार इस रुख ने बांग्लादेशी जनता के सभी वर्गों में उल्लेखनीय आशावाद पैदा किया है क्योंकि देश कई वर्षों बाद अपनी पहली निर्वाचित सरकार की ओर बढ़ रहा है।