ढाकाः विदाई भाषण में भी विवाद ने मुहम्मद यूनुस का साथ नहीं छोड़ा। बांग्लादेश की 18 महीने की अंतरिम सरकार का सोमवार को अंत हो गया। तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार के गठन से पहले राष्ट्र को संबोधित अपने विदाई भाषण में मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने इस्तीफे की घोषणा की। इसी दौरान बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के विकास की दिशा बताते हुए उन्होंने भारत के उत्तर–पूर्वी क्षेत्र का उल्लेख किया।
सोमवार को लगभग 25 मिनट के राष्ट्रवादी तेवर वाले भाषण में अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बांग्लादेश की अहमियत समझाते हुए नोबेल विजेता यूनुस ने भारत के ‘सेवन सिस्टर्स’ का जिक्र किया। उन्होंने एक बार फिर इन सात राज्यों को भारत से अलग पहचान देते हुए उल्लेख किया। साथ ही भारत के उत्तर–पूर्व को नेपाल और भूटान के साथ एकीकृत करने की बात भी कही।
यूनुस ने कहा,“हमारा खुला समुद्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, यह बांग्लादेश के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का खुला द्वार है। नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स को साथ लेकर इस क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि की अपार संभावनाएं हैं।”
गत मार्च में चीन यात्रा के दौरान भी यूनुस ने भारत के उत्तर–पूर्व को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में शांति के नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री को यह कहते सुना गया था कि भारत के उत्तर–पूर्व के सातों राज्य, जिन्हें ‘सेवन सिस्टर्स’ कहा जाता है, पूरी तरह चारों ओर से जमीन से घिरे हुए हैं और समुद्र तक उनकी सीधी पहुंच नहीं है, इसलिए उस क्षेत्र में चीनी व्यापार के विस्तार के लिए समुद्री मार्ग का “एकमात्र संरक्षक” बांग्लादेश ही है।
अब विदाई भाषण में भी उन्होंने भारत के स्थल-आवेष्ठित उत्तर–पूर्वी राज्यों के लिए अपने देश को प्रवेशद्वार के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की।
बांग्लादेश में चीनी निवेश आकर्षित करने के संदर्भ में यूनुस ने कहा था, “भारत के पूर्व के सात राज्यों को सात बहनें कहा जाता है। वे पूरी तरह स्थल से घिरे हुए हैं। समुद्र तक उनकी सीधी पहुंच नहीं है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण बंगाल की खाड़ी में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए चीन के सामने बड़ा अवसर है।”
इन बयानों के बाद उन पर परोक्ष रूप से चीन को उत्तर–पूर्व में प्रभाव बढ़ाने के लिए उकसाने का आरोप लगा था।
हालांकि मार्च में नई दिल्ली उनके इस बयान से असहज हुई थी, लेकिन सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। बताया जाता है कि इसके बाद बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान ढाका को संयमित बयान देने की सलाह दी गई थी। यूनुस के ताजा विदाई भाषण पर भी अब तक नई दिल्ली की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञों के अनुसार, विदाई भाषण में भी यूनुस ने नाम लिए बिना भारत पर कटाक्ष किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“आज का बांग्लादेश अपने स्वतंत्र हितों की रक्षा में विश्वास रखता है, सक्रिय और जिम्मेदार है। बांग्लादेश अब किसी आज्ञाकारी विदेश नीति वाला देश नहीं है और न ही किसी अन्य देश के निर्देश या सलाह पर निर्भर है।”