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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान का बड़ा ऐलान: खालिलुर रहमान बनें विदेश मंत्री

BNP की स्थायी समिति के सदस्य अमीर खसरु महमूद चौधरी को वित्त और योजना मंत्री और BNP के संयुक्त महासचिव सलुद्दीन अहमद को गृह मंत्री नियुक्त किया गया।

By राखी मल्लिक

Feb 18, 2026 17:07 IST

ढाका : बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान ने अपनी कैबिनेट के 50 सदस्यों को मंत्रालय सौंपे हैं। इसमें पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खालिलुर रहमान को विदेश मंत्री बनाया गया है, जो मुहम्मद युनुस की पिछली अंतरिम सरकार से थे। वहीं BNP की वरिष्ठ नेता शमा ओबैद को विदेश मामलों की राज्य मंत्री नियुक्त किया गया है। वे पहले BNP के अंतर्राष्ट्रीय मामलों की उपसमिति की सदस्य रहीं हैं।

मंत्रिमंडल में भूमिकाओं के वितरण के बाद सरकार ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री तारीक रहमान तीन मंत्रालयों के लिए जिम्मेदार होंगे: कैबिनेट डिवीजन, रक्षा मंत्रालय, और सशस्त्र बल विभाग। BNP महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारी मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। BNP की स्थायी समिति के सदस्य अमीर खसरु महमूद चौधरी को वित्त और योजना मंत्री बनाया गया, और BNP के संयुक्त महासचिव सलुद्दीन अहमद को गृह मंत्री नियुक्त किया गया।

12 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में आम चुनाव हुए, जिनसे देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 2024 में एक बड़े आंदोलन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। उसके बाद हुए इस चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने शानदार जीत हासिल की। 300 सदस्यों वाली संसद में पार्टी ने 200 से ज्यादा सीटें जीतीं, जिससे उसे स्पष्ट बहुमत मिल गया।

तारीक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं। वे कई सालों तक देश से बाहर रहे थे। चुनाव के बाद वे वापस आए, अपनी पार्टी का नेतृत्व किया और प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनकी जीत के साथ ही शेख हसीना के लंबे समय से चले आ रहे शासन का अंत हो गया।

चुनाव के साथ एक संवैधानिक जनमत संग्रह भी हुआ और अल्पसंख्यक उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व बढ़ा। मतदान का प्रतिशत अपेक्षाकृत उच्च रहा। रोहाना हेट्टियारची, कार्यकारी निदेशक पीपुल्स एक्शन फॉर फ्री एंड फेयर इलेक्शंस ने चुनाव को प्रतिस्पर्धात्मक और सुव्यवस्थित बताया। हालांकि प्रमुख पार्टियों जैसे आवामी लीग के बहिष्कार और सुधारों पर मतभेदों के कारण देश के सामने अभी भी महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौतियां बनी हुई हैं।

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