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'नाटो को अमेरिका को ग्रीनलैंड लेने देना चाहिए, लेकिन वे बल प्रयोग नहीं करेंगे’- दाओस में ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने प्रभावी रूप से यूरोप को बचाया था और नाटो के बारे में यह भी कहा कि यह उस सबके मुकाबले बहुत छोटी मांग है, जो हमने कई-कई दशकों तक उन्हें दिया है।

By डॉ अभिज्ञात

Jan 21, 2026 23:30 IST

दाओसः विश्व आर्थिक मंच में दिए गए एक असाधारण भाषण में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ज़ोर देकर कहा कि वे ग्रीनलैंड को उसके सभी अधिकार स्वामित्व और मालिकाना हक़ सहित हासिल करना चाहते हैं। हालांकि यह भी कहा कि वे ऐसा करने के लिए बल का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इस दौरान उन्होंने बार बार यूरोपीय सहयोगियों पर कटाक्ष किया और कहा कि नाटो को अमेरिकी विस्तारवाद को रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि वे बर्फ़ का एक टुकड़ा-ठंडा और खराब लोकेशन वाला मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका ने प्रभावी रूप से यूरोप को बचाया था और नाटो के बारे में यह भी कहा कि यह उस सबके मुकाबले बहुत छोटी मांग है जो हमने कई कई दशकों तक उन्हें दिया है। ग्रीनलैंड को लेकर अपनी मंशा को कमतर दिखाने की कोशिश के बावजूद ट्रंप की टिप्पणियों के निहितार्थ बहुत बड़े हो सकते हैं। ऐसा गठबंधन टूटने की आशंका है जो शीत युद्ध की शुरुआत से अब तक मज़बूती से कायम रहा है और जिसे दुनिया के सबसे अडिग समझौतों में गिना जाता रहा है।

नाटो की स्थापना प्रमुख यूरोपीय देशों और कनाडा ने की थी जो लगातार कहते आए हैं कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है और उसे डेनमार्क से छीना नहीं जा सकता। इसका अर्थ यह है कि दावोस की यह बैठक शायद एक बड़े टकराव की शुरुआत भर हो जो अंततः वैश्विक भू राजनीति को नया आकार दे सकता है। हालाँकि ट्रंप ने नाटो से बस अलग हटने का आग्रह किया और एक चेतावनी भी जोड़ दी कि हमें विश्व की सुरक्षा के लिए बर्फ़ का एक टुकड़ा चाहिए और वे हमें नहीं दे रहे। आप हाँ कह सकते हैं और हम बहुत आभारी होंगे या आप ना कह सकते हैं और हम याद रखेंगे। इसके बावजूद उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शायद हमें कुछ भी नहीं मिलेगा जब तक कि मैं अत्यधिक ताक़त और बल प्रयोग का फैसला न करूँ। जिसमें हम सच कहूँ तो अजेय होंगे। लेकिन मैं ऐसा नहीं करूँगा। मैं बल प्रयोग नहीं करूँगा। इसके बजाय उन्होंने ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए तत्काल वार्ताएँ शुरू करने का आह्वान किया। ट्रंप ने कहा कि यह विशाल असुरक्षित द्वीप उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है। यह हमारा क्षेत्र है।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति कई हफ्तों से कहते आ रहे हैं कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड का नियंत्रण हासिल करेगा। उनका तर्क है कि आसपास के आर्कटिक समुद्री क्षेत्र में रूस और चीन से आने वाले ख़तरों का मुकाबला करने के लिए वाशिंगटन का प्रभारी होना ज़रूरी है। ट्रंप ने हर मौके पर यह भी कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है जबकि उनके अनुसार यूरोप इसके ठीक उलट है। दाओस की बैठक को उलट पुलट कर देने की शुरुआत ट्रंप के वहाँ पहुँचने से पहले ही हो गई थी।

एयर फ़ोर्स वन में आई एक मामूली विद्युत समस्या के कारण उन्हें विमान बदलने के लिए वॉशिंगटन लौटना पड़ा जिससे उनका आगमन देर से हुआ। जब ट्रंप का काफ़िला भाषण स्थल की ओर एक संकरी सड़क से गुज़रा तो दर्शक रास्ते में खड़े थे। कुछ लोगों ने अश्लील इशारे किए और एक ने राष्ट्रपति को गाली देते हुए एक काग़ज़ उठा रखा था। इसके बावजूद अरबपति और कारोबारी नेता ट्रंप मंच के अंदर लगभग 1000 लोगों की क्षमता वाले कांग्रेस हॉल में ट्रंप का मुख्य भाषण सुनने के लिए सीटें तलाशते रहे। भाषण शुरू होने तक खड़े खड़े सुनने की जगह भी भर गई थी। उपस्थित लोग अंग्रेज़ी के अलावा छह भाषाओं में भाषण सुनने के लिए हेडसेट का इस्तेमाल कर रहे थे। ट्रंप के मंच पर आते ही अधिकांश लोग खड़े रहे और तालियाँ बजाईं कुछ जोशीली, कुछ केवल औपचारिक। ट्रंप के लगभग पाँच द्विपक्षीय बैठकों में विदेशी नेताओं से मिलने की भी उम्मीद है।

ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि डेनमार्क और सात अन्य सहयोगी अर्ध स्वायत्त क्षेत्र के हस्तांतरण पर बातचीत नहीं करते तो अमेरिका उन पर भारी आयात शुल्क लगाएगा। ट्रंप ने कहा कि शुल्क अगले महीने 10 प्रतिशत से शुरू होंगे और जून में 25 प्रतिशत तक बढ़ेंगे। इस सप्ताह यूरोपीय अधिकारियों के बीच प्रसारित एक टेक्स्ट संदेश में ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने आक्रामक रुख़ को पिछले साल उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने के फैसले से भी जोड़ा। संदेश में उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनेस गार स्टोरे से कहा कि अब उन्हें सिर्फ़ शांति के बारे में सोचने का कोई दायित्व महसूस नहीं होता। भाषण से पहले ही ट्रंप की ग्रीनलैंड महत्वाकांक्षाओं ने यूरोप को खिन्न कर दिया था।

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