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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का दावा-यूरोपीय दबाव के आगे झुके ट्रंप, ग्रीनलैंड पर बदला सुर

अमेरिकी धमकियों से ट्रांस-अटलांटिक संबंधों की सीमाएं उजागर। यूरोपीय दबाव के बाद EU-अमेरिका रिश्तों पर नई बहस।

By श्वेता सिंह

Jan 23, 2026 00:28 IST

ब्रुसेल्सः ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे तेवरों में आई नरमी को यूरोप अपनी कूटनीतिक जीत के तौर पर देख रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि यूरोपीय संघ के सामूहिक दबाव के कारण ही ट्रंप को अपने बयान और रुख में बदलाव करना पड़ा। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब यूरोपीय संघ अमेरिका के साथ अपने संबंधों की नई दिशा तय करने पर विचार कर रहा है।

ब्रसेल्स में आयोजित यूरोपीय संघ की आपात बैठक में पहुंचने पर मैक्रों ने कहा कि जब यूरोप अपने पास मौजूद राजनीतिक, कूटनीतिक और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करता है, तो उसे सम्मान मिलता है। उनके अनुसार, इसी सामूहिक दबाव के चलते ट्रंप ने ग्रीनलैंड को बलपूर्वक अपने नियंत्रण में लेने की धमकी से पीछे हटने का फैसला किया।

डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने पहले इसे “अधिग्रहण” करने की बात कही थी और समर्थन न मिलने पर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। यह बयान यूरोप में गंभीर चिंता का कारण बना। इसके जवाब में EU ने संकेत दिया कि वह आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में सक्षम है और किसी भी आर्थिक दबाव का जवाब देने के लिए तैयार है।

यूरोप की इस संयुक्त प्रतिक्रिया के बाद ट्रंप ने पहली बार यह कहा कि वह ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए बल प्रयोग नहीं करेंगे और टैरिफ की धमकी भी फिलहाल वापस ले ली। मैक्रों के अनुसार, यह दिखाता है कि जब यूरोप अपने राजनीतिक और कूटनीतिक साधनों का इस्तेमाल करता है, तो अमेरिका भी उसे गंभीरता से लेने को मजबूर होता है।

हालांकि, यूरोपीय नेताओं के बीच इस बात को लेकर सतर्कता है कि ट्रंप का यह बदला हुआ रुख स्थायी है या नहीं। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने दोहराया कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर कोई बातचीत नहीं होगी, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग पर चर्चा संभव है।

ग्रीनलैंड विवाद ने यूरोपीय संघ के सामने एक बड़ा रणनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है। ट्रंप प्रशासन की अनिश्चित नीतियों ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ लंबे समय से चले आ रहे भरोसेमंद रिश्ते अब पहले जैसे नहीं रहे। ऐसे में EU के भीतर आत्मनिर्भर सुरक्षा नीति और संतुलित कूटनीति की मांग तेज होती जा रही है।

यह मामला केवल ग्रीनलैंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत देता है कि आने वाले समय में यूरोप को अमेरिका के साथ रिश्तों में अधिक सख्ती और स्पष्टता अपनानी पड़ सकती है।

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