मुंबईः अमेरिका की सेना की कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में मादुरो युग का अंत हो गया है। राष्ट्रपति भवन से निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया। इस घटना के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता चरम पर पहुंच गई है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अनुसार, वेनेजुएला की स्थिति का भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर नहीं होगा लेकिन जिन कंपनियों का वहां व्यापार या निवेश है, उन्हें असर महसूस हो सकता है।
एनर्जी सेक्टर की कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। ओएनजीसी के दो तेल प्रोजेक्ट वेनेजुएला में चल रहे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज लंबे समय से वहां से कच्चा तेल खरीदती रही है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और ऑयल इंडिया के कुछ प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी है। मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकैमिकल्स पहले वहां से कच्चा तेल मंगाती थी, लेकिन अब वह मात्रा कम हो गई है। इंजीनियर्स इंडिया का कार्यालय राजधानी कैराकस में मौजूद है।
फार्मा सेक्टर की कंपनियों पर भी असर पड़ सकता है। सिप्ला वहां नित्य आवश्यक दवाइयां सप्लाई करती है। ग्लेनमार्क और सान फार्मा अपने रजिस्टर्ड सब्सिडियरी के माध्यम से व्यापार करती हैं। डॉ. रेड्डीज़ की मौजूदगी वहां है, लेकिन वर्तमान में उनका कारोबार पहले जैसा नहीं रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला की राजनीतिक अस्थिरता मुख्य रूप से एनर्जी और फार्मा सेक्टर की भारतीय कंपनियों को प्रभावित करेगी। हालांकि, भारत की व्यापक अर्थव्यवस्था पर इसका असर सीमित रहेगा।
इन कंपनियों के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वे व्यापारिक रणनीति और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान दें। भविष्य में वेनेजुएला की नई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार इन कंपनियों के संचालन और व्यापारिक फैसलों में बदलाव देखने को मिल सकता है।