नया साल शुरू होते ही बड़ी संख्या में करदाताओं की चिंता बढ़ गई है। वजह है—इनकम टैक्स रिफंड का अटक जाना। कई लोगों को 31 दिसंबर की समयसीमा के बाद भी न तो रिफंड मिला और न ही कोई स्पष्ट जानकारी। लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अब भी सुधार और रिफंड पाने के कई रास्ते खुले हैं।
क्यों अटक जाता है ITR रिफंड?
अधिकतर मामलों में रिफंड अटकने की वजह होती है—
फॉर्म 16 और ITR में डाटा मिसमैच
TDS या TCS की गलत एंट्री
टैक्स या ब्याज की गणना में त्रुटि
बैंक डिटेल्स में गलती
जैसे ही सिस्टम को कोई विसंगति दिखती है, CPC (Centralised Processing Centre) रिटर्न की प्रोसेसिंग रोक देता है।
70 लाख से ज्यादा ITR अब भी प्रोसेस नहीं
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 28 दिसंबर 2025 तक करीब 8.5 करोड़ ITR फाइल और वेरिफाई किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 7.8 करोड़ रिटर्न प्रोसेस हो चुके हैं, लेकिन अब भी 70 लाख से ज्यादा रिटर्न CPC में अटके हुए हैं। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें बड़ी संख्या उन करदाताओं की है जिन्होंने रिफंड क्लेम किया है।
31 दिसंबर के बाद भी सुधार संभव, सेक्शन 154 बना सहारा
अगर आपका ITR पहले ही प्रोसेस हो चुका है और आपको सेक्शन 143(1) के तहत इंटिमेशन मिल गया है, लेकिन रिफंड कम दिख रहा है या नहीं मिला, तो आप सेक्शन 154 (Rectification) के तहत आवेदन कर सकते हैं। यह विकल्प खास तौर पर तब उपयोगी है जब गलती छोटी और तकनीकी हो। रेक्टिफिकेशन की सुविधा इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध है और इसे 31 दिसंबर के बाद भी फाइल किया जा सकता है।
ITR में गलती है तो Revised Return भी एक विकल्प
अगर रिटर्न अभी प्रोसेस नहीं हुआ है और आपने कोई गलती पकड़ ली है, तो सेक्शन 139(5) के तहत Revised Return फाइल की जा सकती है। अच्छी बात यह है कि इसे एक से ज्यादा बार भी फाइल किया जा सकता है, बशर्ते तय समयसीमा के भीतर हो। यह सुविधा बेलटेड रिटर्न पर भी लागू होती है।
31 दिसंबर की डेडलाइन मिस की तो क्या होगा?
अगर आपने 31 दिसंबर तक गलती नहीं सुधारी, तो आपके पास केवल Updated Return (ITR-U) का विकल्प बचेगा। लेकिन इसमें अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के मुताबिक—
पहले साल: 25% अतिरिक्त टैक्स
दूसरे साल: 50%
तीसरे साल: 60%
चौथे साल: 70% तक भुगतान करना पड़ सकता है
क्या 31 दिसंबर के बाद रिफंड नहीं मिलेगा?
ऐसा नहीं है। अगर आपके ITR में कोई गलती नहीं है और प्रोसेसिंग में देरी विभाग की तरफ से है, तो आपको रिफंड के साथ ब्याज भी मिलेगा। लेकिन अगर कोई अलर्ट आया है, तो उसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
रिफंड के लिए किससे करें अपील?
रिफंड की राशि के आधार पर अलग-अलग स्तर पर आवेदन किया जा सकता है—
10 लाख रुपये तक: CIT या Principal CIT
10 से 50 लाख रुपये तक: CCIT या Principal CCIT
50 लाख से ज्यादा: CBDT (Central Board of Direct Taxes)
ITR रिफंड अटकना परेशानी जरूर है, लेकिन समाधान भी उतने ही स्पष्ट हैं। जरूरी है कि करदाता अपने रिटर्न की स्थिति चेक करें, अलर्ट्स पर ध्यान दें और सही सेक्शन के तहत समय रहते कार्रवाई करें। थोड़ी सतर्कता आपको लंबे इंतजार और अतिरिक्त टैक्स बोझ से बचा सकती है।