नयी दिल्लीः देश की सरकारी तेल और गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने इथेन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जापान की प्रमुख शिपिंग कंपनी मित्सुई ओएसके लाइन्स (MOL) के साथ दो जॉइंट वेंचर में कदम रखा है। इन दोनों जॉइंट वेंचर्स में ONGC की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत होगी। यह साझेदारी खास तौर पर इथेन की ढुलाई के लिए बनाए जाने वाले विशेष मालवाहक जहाजों के संचालन से जुड़ी है।
दो बड़े इथेन कैरियर, 370 मिलियन डॉलर का निवेश
सूत्रों के अनुसार, दोनों जॉइंट वेंचर्स के पास एक-एक विशाल इथेन कैरियर जहाज होगा। इन दोनों जहाजों की कुल अनुमानित लागत 370 मिलियन अमेरिकी डॉलर बताई जा रही है। ये जहाज अमेरिका से इथेन लेकर भारत आएंगे। इस इथेन का उपयोग ONGC की पेट्रोकेमिकल इकाई ONGC पेट्रो एडिशंस लिमिटेड (OPaL) में किया जाएगा। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, 2028 के मध्य से इथेन आयात की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
GIFT City में पंजीकृत होंगी नई कंपनियां
इन जॉइंट वेंचर्स के नाम Bharat Ethane One IFSC और Bharat Ethane Two IFSC रखे गए हैं। दोनों कंपनियां गुजरात की GIFT City में पंजीकृत होंगी। ONGC इन कंपनियों में निर्धारित संख्या में शेयर खरीदेगी, जबकि MOL भारत के झंडे वाले इन इथेन कैरियर जहाजों का संचालन करेगी।
क्यों उठाया गया यह कदम?
ONGC अपने पेट्रोकेमिकल कारोबार के लिए इथेन की नियमित और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना चाहती है। मौजूदा समय में कतर जैसे देश ऐसे प्राकृतिक गैस मिश्रण की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें इथेन और प्रोपेन की मात्रा कम होती जा रही है। ऐसे में ONGC ने यह रणनीति बनाई है कि वह 2028 से हर साल लगभग 8 लाख टन इथेन अमेरिका से आयात करेगी ताकि OPaL के उत्पादन पर किसी तरह का असर न पड़े।
शिपिंग में MOL का अनुभव बनेगा सहारा
MOL शिपिंग क्षेत्र की एक अनुभवी कंपनी है। यह पहले से ही भारत में Petronet LNG के जहाजों का संचालन कर रही है और रिलायंस इंडस्ट्रीज के इथेन कैरियर भी संभालती है। ONGC के लिए बनने वाले दोनों नए इथेन कैरियर जहाजों का निर्माण दक्षिण कोरिया में किया जाएगा।
ONGC का यह कदम न सिर्फ उसकी सप्लाई चेन को मजबूत करेगा बल्कि देश के पेट्रोकेमिकल उद्योग को भी लंबे समय तक स्थिरता प्रदान करेगा।