बीजिंगः अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच चीन ने मेटा के एक बड़े फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है। चीन ने गुरुवार को घोषणा की कि वह अमेरिकी टेक दिग्गज मेटा द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप Manus के अधिग्रहण की समीक्षा और जांच करेगा। इस कदम को अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिद्वंद्विता के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
मेटा ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि वह Manus का अधिग्रहण कर रहा है। Manus भले ही सिंगापुर स्थित कंपनी हो लेकिन उसकी जड़ें चीन से जुड़ी रही हैं। ऐसे समय में जब वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव चरम पर है किसी अमेरिकी कंपनी द्वारा चीनी मूल की AI कंपनी का अधिग्रहण असामान्य माना जा रहा है।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता हे याडोंग ने कहा कि संबंधित विभागों के साथ मिलकर यह जांच की जाएगी कि यह अधिग्रहण चीनी कानूनों और नियमों के अनुरूप है या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी निवेश, तकनीक निर्यात, डेटा ट्रांसफर और सीमा-पार विलय से जुड़ी सभी गतिविधियों को चीनी कानूनों का पालन करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा अब चीनी नीति-निर्माताओं की सबसे बड़ी चिंता बन गई है। नैटिक्सिस बैंक के अर्थशास्त्री गैरी एनजी के अनुसार ऐसी किसी भी तकनीक के हस्तांतरण पर कड़ी नजर रखी जाएगी जिससे अमेरिका को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
मेटा ने कहा है कि अधिग्रहण के बाद Manus में कोई भी चीनी स्वामित्व नहीं रहेगा और कंपनी चीन में अपनी सेवाएं बंद कर देगी। हालांकि Manus सिंगापुर में अपना संचालन जारी रखेगी। उल्लेखनीय है कि Manus द्वारा विकसित “जनरल-पर्पज” AI एजेंट जटिल कार्यों को स्वतः पूरा करने में सक्षम है और उसकी वार्षिक आय 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक बताई गई है।