नई दिल्लीः डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद रूस से ऊर्जा खरीदने को लेकर उनका रुख काफी सख्त हो गया है। भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर रूस से तेल और गैस खरीदने को लेकर दबाव बढ़ाया जा रहा है। इसी सिलसिले में ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी संसद में एक विधेयक पेश करने की अनुमति दी है। अगर यह विधेयक पास होकर कानून बन जाता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर एकतरफा तौर पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगा सकेंगे।
इन्हीं हालात के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के लिए एक वैकल्पिक रास्ता खुला रखा है। इस विकल्प के तहत भारत वेनेजुएला से तेल खरीद सकता है। समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिका भारत को एक नई व्यवस्था के तहत वेनेजुएला से तेल खरीदने की अनुमति देगा। हालांकि यह पूरी प्रक्रिया अमेरिकी प्रशासन के नियंत्रण में रहेगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि ट्रंप सरकार भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की इजाजत दे सकती है। हालांकि शुक्रवार रात तक तेल की खरीद-बिक्री से जुड़ी शर्तें तय नहीं हो पाई थीं।
गौरतलब है कि भारत पहले वेनेजुएला से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता था। लेकिन बाद में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए जाने के कारण भारत ने वहां से तेल खरीदना बंद कर दिया था।
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में रिलायंस इंडस्ट्रीज के अधिकारियों ने नियमों के अनुरूप वेनेजुएला से तेल खरीदने में रुचि दिखाई है। रिलायंस के अधिकारियों का कहना है कि अगर व्हाइट हाउस वेनेजुएला के कच्चे तेल को वैश्विक बाजार में बेचने की अनुमति देता है तो कंपनी किसी समझौते पर विचार कर सकती है।
रिलायंस समूह की इस रुचि के सामने आने के बाद व्हाइट हाउस की ओर से वेनेजुएला के तेल की बिक्री को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले समय में भारत के कच्चे तेल आयात में नए समीकरण बन सकते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में रूस के कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रही है लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कंपनी के अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें इस साल जनवरी में रूसी तेल मिलने की उम्मीद नहीं है। पिछले तीन हफ्तों से जामनगर स्थित उनकी रिफाइनरी में रूसी तेल की कोई शिपमेंट नहीं पहुंची है।
यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों में भारत में रूसी तेल का आयात लगातार घटा है। पिछले साल जून में भारत रोजाना करीब 20 लाख बैरल रूसी तेल आयात करता था, जो पिछले दिसंबर में घटकर रोजाना लगभग 12 लाख बैरल रह गया।