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2025 में उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

मंत्रालय ने कहा कि यह लगातार वृद्धि भारत के उर्वरक निर्माण तंत्र की मजबूती और सरकारी हस्तक्षेप की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

By राखी मल्लिक

Jan 10, 2026 14:14 IST

2025 में भारत की कुल उर्वरक मांग का लगभग 73% घरेलू उत्पादन से पूरा हुआ

मंत्रालय ने कहा कि यह लगातार वृद्धि भारत के उर्वरक निर्माण तंत्र की मजबूती और सरकारी हस्तक्षेप की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

नई दिल्ली : केंद्रीय सरकार ने हाल ही में समाप्त हुए वर्ष में देश की उर्वरक आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है। 2025 में देश की कुल उर्वरक आवश्यकता का लगभग 73 प्रतिशत घरेलू उत्पादन से पूरा हुआ। जो आत्मनिर्भरता हासिल करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है यह जानकारी रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने दी।

सरकार ने कहा कि वह किसानों को सशक्त बनाने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने, और देशभर में उर्वरकों की विश्वसनीय और निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार सरकार किसानों को समय पर पोषक तत्व उपलब्ध कराने और उर्वरक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दे रही है। साथ ही मुख्य कच्चे माल के लिए दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते को प्राथमिकता दी है और वैश्विक अनिश्चितताओं और आपूर्ति व्यवधानों से बचाव के लिए रणनीतिक विविधीकरण की नीति अपनाई है।

सरकार ने कहा कि इन लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप पिछले पांच वर्षों में घरेलू उर्वरक उत्पादन में निरंतर और स्थिर वृद्धि देखी गई है।

उर्वरकों का कुल घरेलू उत्पादन, जिसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी शामिल हैं। 2021 में 433.29 लाख टन से बढ़कर 2022 में 467.87 लाख टन हुआ, फिर 2023 में 507.93 लाख टन तक पहुंच गया। यह वृद्धि 2024 में भी जारी रही, जब उत्पादन 509.57 लाख टन हुआ, और 2025 में यह अब तक के सबसे उच्च स्तर 524.62 लाख टन तक पहुँच गया।

मंत्रालय ने कहा कि यह लगातार वृद्धि भारत के उर्वरक निर्माण तंत्र की मजबूती और सरकारी हस्तक्षेप की प्रभावशीलता को दर्शाती है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि सीधे सरकार की सक्रिय और प्रभावी नीतिगत पहलों का परिणाम है। जिसका उद्देश्य उर्वरक क्षेत्र को मजबूत करना और कृषि अर्थव्यवस्था का समर्थन करना है।

घरेलू उत्पादन में इस वृद्धि को नए उर्वरक संयंत्रों की स्थापना, पहले बंद पड़े कारखानों का पुनरुद्धार, स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा, और कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता से प्रेरित बताया गया है। सरकार ने कहा कि वह उर्वरक सुरक्षा को और मजबूत करने, किसानों को समय पर और किफायती इनपुट उपलब्ध कराने, और आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि के अनुरूप सतत कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने उर्वरक आयात पर देश की निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2025 में देश की कुल उर्वरक आवश्यकता का लगभग 73 प्रतिशत घरेलू उत्पादन से पूरा किया गया, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है। सरकार ने कहा कि वह किसानों को सशक्त बनाने, आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और देशभर में उर्वरकों की भरोसेमंद व निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार किसानों को समय पर आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने और उर्वरक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत कच्चे माल की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक समझौतों को प्राथमिकता दी गई है और वैश्विक अनिश्चितताओं तथा आपूर्ति में आने वाले व्यवधानों से निपटने के लिए रणनीतिक विविधीकरण की नीति अपनाई गई है। सरकार का कहना है कि इन निरंतर प्रयासों के चलते पिछले पांच वर्षों में घरेलू उर्वरक उत्पादन में लगातार और स्थिर वृद्धि देखने को मिली है।

आंकड़ों के अनुसार यूरिया, डीएपी, एनपीके और एसएसपी सहित कुल घरेलू उर्वरक उत्पादन 2021 में 433.29 लाख टन था, जो 2022 में बढ़कर 467.87 लाख टन हुआ। इसके बाद 2023 में उत्पादन 507.93 लाख टन तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी 2024 में भी जारी रही, जब उत्पादन 509.57 लाख टन दर्ज किया गया, जबकि 2025 में यह अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 524.62 लाख टन पर पहुंच गया।

मंत्रालय ने कहा कि उत्पादन में यह निरंतर वृद्धि भारत के उर्वरक निर्माण तंत्र की मजबूती और सरकारी हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता को दर्शाती है। यह उपलब्धि सरकार की सक्रिय और प्रभावी नीतिगत पहलों का परिणाम है, जिनका उद्देश्य उर्वरक क्षेत्र को मजबूत करना और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को समर्थन देना है। घरेलू उत्पादन में हुई इस बढ़ोतरी के पीछे नए उर्वरक संयंत्रों की स्थापना, पहले बंद पड़े कारखानों का पुनरुद्धार, स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा और कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता जैसे प्रमुख कारण बताए गए हैं। सरकार ने दोहराया कि वह उर्वरक सुरक्षा को और मजबूत करने, किसानों को समय पर और किफायती उर्वरक उपलब्ध कराने तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप सतत कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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