हिंदू धर्म में सूर्यग्रहण को अशुभ महाजागतिक घटना माना जाता है। प्रचलित विश्वास के अनुसार, ग्रहण के समय अशुभ शक्ति आकाश और वायु में फैल जाती है। यह अशुभ शक्ति हमारे घर, पूजा स्थल और मन पर हानिकारक प्रभाव डालती है। इस नकारात्मक ऊर्जा को रोकने के लिए वास्तु शास्त्र में कई उपाय बताए गए हैं। उनमें से एक है भोजन में तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल।
ग्रहण के दौरान तुलसी पत्ता का उपाय
कहा जाता है कि ग्रहण के समय निकाले गए नकारात्मक ऊर्जा का पहला प्रभाव खाने और पानी पर पड़ता है। इसलिए ग्रहण के अशुभ प्रभाव से खाने और पानी को बचाने के लिए उसमें तुलसी पत्ता डालने का नियम है। अत्यंत शुभ और फलदायक तुलसी सभी नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकती है, ऐसा प्रचलित विश्वास है।
खाने में तुलसी पत्ता डालने का नियम
ग्रहण शुरू होने से पहले ही खाने में तुलसी पत्ता डाल दें। पके हुए खाने के अलावा अन्य खाने में भी तुलसी पत्ता मिलाएँ। विशेष रूप से अचार, दूध, दही और पानी में तुलसी पत्ता जरूर डालें। किसी कारणवश तुलसी पत्ता डालना संभव न हो तो वह खाना न खाएँ, इन्हें फेंक दें और ग्रहण के बाद नया खाना बनाएँ। वर्ना स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
अवसर ग्रहण के बाद और क्या करना चाहिए ?
सूर्यग्रहण के खत्म होने के बाद पूरे घर को साफ पानी से पोंछ लें। घर पोछने के पानी में थोड़ा नमक मिला लें। घर के दरवाजे और खिड़कियां खोलकर ताजी हवा आने दें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाएगी। ग्रहण के बाद अच्छी तरह स्नान करें। नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें। इससे आपका मन और शरीर शुद्ध होगा।
स्नान के बाद पूरे घर में अच्छी तरह गंगाजल छिड़कें। इस गंगाजल में थोड़ा कपूर मिला दें। दूर्वा घास या आम्रपत्र को गंगाजल में भिगोकर इसे मुख्य दरवाजा, रसोई, शौचालय और पूजा घर के सामने छिड़क दें। गंगाजल और कपूर का मिश्रण सभी प्रकार की वास्तु दोष दूर करता है।
सूर्यग्रहण के बाद घर में थोड़ा कपूर जलाएं। इस धुएं को पूरे घर में फैलाएं। साफ कपड़े से सभी देवताओं की मूर्तियों को पोंछें। घी का दीपक और धूपकड़ी जलाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाएगी।