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देवी सरस्वती के स्वरूप, उनके हाथों मे वीणा और वाहन हंस होने का रहस्य क्या है ?

सरस्वती पूजा में मां सरस्वती की मूर्ति और तस्वीर जब आप घर लाते हैं तो देखते हैं कि माता श्वेत वस्त्र में होती हैं। माता के हाथों में वीणा, पुस्तक, माला और उनसके साथ उनकी सवारी हंस विराजमान होता है। आइए जानते हैं माता सरस्वती के इस स्वरूप का क्या है रहस्य ?

By लखन भारती

Jan 23, 2026 11:44 IST

देवी सरस्वती का स्वरूप निर्मल चांद के समान है और मुख पर कांति व्याप्त है। माता स्वेत और पीत वस्त्रों को धारण करती हैं। मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी माता को देवी सरस्वती का ही रूप माना जाता है। ब्रह्मचारिणी माता के रूप में देवी सरस्वती पीत वस्त्र धारण करती हैं। वैसे आमतौर पर माता सरस्वती को स्वेत वस्त्रों को धारण किेए ही हर प्रतिमा और तस्वीरों में दिखाया जाता है। माता कमल पर और हंस पर विराजमान होती हैं। और अपने चतुर्भुज रूप को धारण कर वीणा की मधुर ध्वनि झंकृत करती हैं। माता की वीणा की इसी ध्वनि से सृष्टि में सभी जीव जंतुओं पर प्रकृति में स्वर गूंजता है। आइए जानते हैं माता के निर्मल और उज्जवल स्वरूप और हाथों में वीणा, पुस्तक, अक्ष माला एवं वाहन हंस होने का रहस्य।

माता सरस्ववती श्वेत व पीत वस्त्र क्यों धारण करती हैं ?

माता सरस्वती को ज्ञान की देवी कहा जाता है। सृष्टि में ज्ञान विज्ञान और जितनी भी विद्याएं हैं सबकी देवी माता सरस्वती हैं। माता सरस्वती ज्ञान की प्रकाष्ठा हैं इसलिए इन पर सांसारिक रंग चढ ही नहीं सकता है। इसलिए माता शांति और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक रंग रंग का वस्त्र धारण करती हैं। जबकि पीत वस्त्र त्याग और भक्ति भाव का प्रतीक है। पीले रंग का संबंध गुरु ग्रह से भी माना जाता है जो ज्ञान के कारक ग्रह हैं। इसलिए देवी सरस्वती को ज्ञान का प्रतीक रंग पीला भी प्रिय है। इसलिए देवी सरस्वती को प्रसाद के रूप में पीले फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है।

देवी सरस्वती के हाथों में पुस्तक का रहस्य

देवी सरस्वती ज्ञान की देवी हैं और पुस्तक ज्ञान का भंडार है। कहते हैं सृष्टि का संपूर्ण ज्ञान वेदों में छिपा है बस उसे समझने की जरूरत है। देवी सरस्वती ज्ञान की उसी प्रतिमूर्ति वेदों को अपने हाथों में धारण करती हैं। वेद माता की हाथों की शोभा हैं। इसलिए सरस्वती पूजा के दिन बच्चे उन पुस्तकों को माता सरस्वती के समीप रखते हैं और उनकी पूजा करते हैं जो उन्हें कठिन जान पड़ता है। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि माता सरस्वती की कृपा होने से कठिन विषय भी समझना सरल हो जाता है।

देवी का वाहन क्यों राजहंस ?

सरस्वती का वाहन क्यों राजहंस है, यह हंस की विशेषताओं में छिपा है। राजहंस की सबसे बड़ी विशेषता है सही और गलत की पहचान या सार और असार में भेद करने की क्षमता। कहा जाता है कि भले ही दूध पानी में मिला हो, हंस उसमें से केवल दूध चुनकर पी सकता है। पत्तियों में भी वह अपने खाने का चयन कर सकता है। यही प्रतीक है कि बुराई के बीच भी अच्छाई को चुनना। हमारे चारों ओर विभिन्न आवश्यक और अनावश्यक जानकारियों में से केवल सही ज्ञान को ग्रहण करना आवश्यक है। मिथ्या के मोह को त्यागकर केवल सार वस्तु ग्रहण करने की शिक्षा देवी के वाहन से मिलती है।

माता सरस्वती के हाथों में वीणा का रहस्य

माता सरस्वती के प्राकट्य को लेकर कथा है कि सृष्टि में देवी सरस्वती के आगमन से पहले सृष्टि में कोई ध्वनि नहीं थी। पूरी सृष्टि निःशब्द और स्वर विहीन थी। देव सरस्वती वीणा लेकर प्रकट हुई थीं। इन्होंने अपनी वाणी के तारों को झंकृत किया तो नदियों और पक्षियों में स्वर गूंजने लगे। मूक सृष्टि में स्वर लहरी बहने लगी। देवी की वाणी प्राण का प्रतीक है, वाणी का प्रतीक है। देवी सरस्वती बताती हैं कि केवल किताबी ज्ञान ही नहीं कला का ज्ञान भी संसार के लिए आवश्यक है। क्योंकि कला विहीन सृष्टि में प्राण का स्पंदन नहीं हो सकता है। इसलिए देवी सरस्वती हाथों में वीणा धारण करती हैं।

माता सरस्वती के हाथों में अक्ष माला का रहस्य

देवी सरस्वती के एक हाथ में अक्ष माला है जिसे सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्माजी भी धारण करते हैं। अक्ष माला 'अ' वर्ण से प्रारम्भ होकर 'क्ष' वर्ण पर समाप्त होती है। यह ज्ञान के अक्षय होने का प्रतीक है। देवी सरस्वती अक्षमाला इसलिए भी धारण करती हैं कि यह छात्रों को बताती हैं कि ज्ञान पाने के लिए साधक की तरह ध्यान मग्न होकर मन का मनका फेरना चाहिए। जो ऐसा करते हैं वही परम ज्ञान को पाने में सफल होते हैं।

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