नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसदों ने सोमवार को बिहार से जुड़े कई मुद्दों को लेकर संसद परिसर में प्रदर्शन किया। उन्होंने बिहार को स्पेशल कैटेगरी का दर्जा, राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति और हाल ही में एक नीट (NEET) अभ्यर्थी की मौत का मामला शामिल है।
प्रदर्शन के दौरान ANI से बात करते हुए राजद सांसद मीसा भारती ने कहा कि केंद्रीय बजट में बिहार की लंबे समय से लंबित मांगों को नज़रअंदाज़ किए जाने के कारण पार्टी ने बजट सत्र के दौरान राज्य के “ज्वलंत मुद्दे” उठाने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा, “बिहार में कई समस्याएं हैं और वहां की जनता की कई मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। बजट सत्र चल रहा है इसलिए हमने सोचा कि बिहार के ज्वलंत मुद्दों को उठाया जाए, खासकर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने का मुद्दा। बजट में बिहार के लिए कुछ भी नहीं था। हम बिहार में कानून-व्यवस्था और नीट अभ्यर्थी की मौत का मुद्दा भी उठा रहे हैं। हम चाहते हैं कि सरकार जवाब दे और इस पर कार्रवाई हो…”
तख्तियां लेकर और नारे लगाते हुए आरजेडी नेताओं ने केंद्र सरकार पर केंद्रीय बजट में बिहार की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि विपक्ष द्वारा बार-बार मांग उठाए जाने के बावजूद राज्य की अहम समस्याओं को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि बिहार को विशेष श्रेणी का दर्जा देने की मांग लंबे समय से उठती रही है। विपक्षी दलों का तर्क है कि सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों, बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं और अपेक्षाकृत कम प्रति व्यक्ति आय के कारण राज्य को केंद्र से अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।विशेष दर्जे की मांग के अलावा आरजेडी सांसदों ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। नीट अभ्यर्थी की मौत का हवाला देते हुए पार्टी ने जवाबदेही तय करने और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
यह प्रदर्शन लोकसभा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के बाद हुआ है। इस पर चर्चा के लिए सदन ने 18 घंटे निर्धारित किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 4 फ़रवरी बुधवार को जवाब देंगे, जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 11 फ़रवरी को जवाब देने की उम्मीद है।
बजट सत्र कुल 65 दिनों में 30 बैठकों तक चलेगा और 2 अप्रैल को समाप्त होगा। दोनों सदन 13 फ़रवरी को अवकाश के लिए स्थगित होंगे और 9 मार्च को फिर से बैठक करेंगे, ताकि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों की जांच स्थायी समितियों द्वारा की जा सके।