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तिलजला हादसे के बाद बड़ा एक्शन, अवैध फैक्ट्रियों का बिजली-पानी बंद करने का आदेश

तिलजला अग्निकांड के बाद सख्त रुख, सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा– कोलकाता समेत संवेदनशील इलाकों में चलाया जाएगा व्यापक ऑडिट अभियान।

By श्वेता सिंह

May 13, 2026 16:00 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में अवैध निर्माण और बिना स्वीकृत बिल्डिंग प्लान के चल रहे उद्योगों के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नवान्न से साफ निर्देश दिया है कि ऐसे सभी कारखानों की पहचान कर उनके बिजली और पानी के कनेक्शन तत्काल प्रभाव से काटे जाएं।

सरकार का यह आदेश विशेष रूप से कोलकाता के तिलजला, कसबा, मोमिनपुर और एकबालपुर जैसे इलाकों में स्थित औद्योगिक इकाइयों पर लागू होगा। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को ऐसे प्रतिष्ठानों का व्यापक आंतरिक ऑडिट करने और बिना मंजूरी संचालित इकाइयों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

बिजली विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह सीईएससी (CESC) जैसी एजेंसियों के सहयोग से उन सभी इमारतों और फैक्ट्रियों की जांच करे जिनके पास वैध बिल्डिंग प्लान नहीं है। ऐसी इकाइयों का कनेक्शन तुरंत काटने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही नगर विकास विभाग को एक दिन के भीतर अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया गया है। इस अभियान में कोलकाता नगर निगम (KMC)और कोलकाता पुलिस को संयुक्त रूप से शामिल किया गया है ताकि कार्रवाई तेज और प्रभावी हो सके।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि खतरनाक स्थिति में चल रही अवैध फैक्ट्रियों में पानी की आपूर्ति भी बंद की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम औद्योगिक सुरक्षा और भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह सख्त निर्णय तिलजला में हाल ही में हुए अग्निकांड के बाद सामने आया है, जिसमें एक अवैध चर्म कारखाने में आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि संबंधित फैक्ट्री बिना किसी स्वीकृत प्लान के संचालित हो रही थी।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि राज्य में अब अवैध निर्माण और नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को राज्य में औद्योगिक सुरक्षा और शहरी नियोजन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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