गुरुवार (5 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल के राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) को लेकर मामले की सुनवाई थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि महंगाई भत्ता (DA) पाना हर सरकारी कर्मचारी का कानूनी अधिकार है।
इसके साथ ही राज्य के सरकारी कर्मचारियों का बकाया DA देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का भी गठन करने का आदेश दिया है। बताया जाता है कि यहीं कमेटी राज्यय सरकार के साथ बातचीत कर DA देने का मामला निपटाएगी। इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश इंदू मल्होत्रा और 2 अन्य न्यायाधीशों को शामिल किया गया है।
अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 31 मार्च तक राज्य सरकार को बकाया DA का 25% हिस्सा सभी राज्य कर्मचारियों को दे देना होगा। अदालत का आदेश लागू हुआ अथवा नहीं इसे सुनिश्चित करने के लिए 15 मई तक एक रिपोर्ट (कम्प्लाएंट रिपोर्ट) अदालत में जमा करनी होगी।
न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्र की खंडपीठ ने यह आदेश सुनाया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाकी 75% DA को किस्तों में देना होगा। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह DA देने के लिए राज्य सरकार को करीब 10 हजार 400 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे।
राज्य सरकार के कर्मचारियों का एक समूह पिछले लंबे समय से केंद्रीय दर पर DA और बकाया DA की मांग पर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। स्टेट एडमिनीस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (SAT) की ओर से इस मामले का फैसला सुनाया था। कलकत्ता हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने सरकारी कर्मचारियों के पक्ष में अपना फैसला सुनाया था।
20 मई 2022 को कलकत्ता हाई कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार के कर्मचारियों को केंद्र के बराबर DA देने का आदेश दिया था। हालांकि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
गुरुवार (5 फरवरी) को इसी मामले का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया। पिछले साल 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में DA मामले की सुनवाई पूरी हुई। वर्तमान में राज्य के कर्मचारियों को 18% की दर से DA दिया जाता है। वहीं केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 58% की दर से DA मिलता है। यानी बंगाल सरकार और केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारियों को दिए जाने वाले DA की दर में 40% का अंतर है।
गौरतलब है कि 16 मई को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जो फैसला सुनाया था उसमें कहा था कि 4 सप्ताह के अंदर बकाया DA का 25% दे देना होगा। इस फैसले के अनुसार मियाद 27 जून को खत्म हो गयी लेकिन राज्य सरकार ने अदालत से अतिरिक्त 6 महीने का समय मांगा था।