साल 2026 में राज्यसभा में पश्चिम बंगाल से 5 सीटें खाली हो रही है जिनमें से 4 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होने हैं। तृणमूल को पूरा भरोसा है कि इन चारों सीटों पर उन्हें ही जीत मिलेगी।
राज्यसभा (Rajya Sabha) की चार सीटों के लिए जिन उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की गयी है उनमें बाबुल सुप्रीयो, कोयल मल्लिक, मेनका गुरुस्वामी के अलावा सबसे अधिक जिस नाम की चर्चा हो रही है वह नाम है पूर्व IPS अधिकारी राजीव कुमार का।
बतौर पुलिस अधिकारी लंबा समय बिताने के बाद इसी साल 31 जनवरी को डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) के पद से वह रिटायर हुए। राजीव कुमार के साथ जिस प्रकार से कई विवाद जुड़े रहे हैं उसी तरह से उनके हिस्से में कई उपलब्धियां भी शामिल रही हैं।
इंजीनियर से पुलिस अधिकारी और अब राज्यसभा
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के चंदौसी के रहने वाले राजीव कुमार ने यूनिवर्सिटी ऑफ रुड़की (वर्तमान IIT रुड़की) से कम्प्यूटर साइंस की डिग्री हासिल की। राजीव कुमार के दादा मुरादाबाद के सांसद रह चुके हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि राजनीति उनके लिए कोई नई बात नहीं है। वर्ष 1989 के बैच के अधिकारी राजीव कुमार विधाननगर पुलिस के कमिश्नर और कोलकाता पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के डायरेक्टर भी रह चुके हैं।
वर्ष 2016 में पहली बार वह कोलकाता पुलिस के कमिश्नर बनाए गए थे लेकिन चुनाव आयोग ने उन्हें इस पद से हटा दिया था। बाद में मई 2016 में उन्होंने फिर से इस पद पर ज्वाइन किया और फरवरी 2019 तक इसी पद पर बने रहे।
प्रोफाइल में शामिल हैं कई उपलब्धियां
अगर पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स को खंगाला जाए तो राजीव कुमार के प्रोफाइल में कई उपलब्धियां शामिल नजर आती हैं। इनमें वर्ष 2002 में अमेरिकन सेंटर पर हमले की जांच में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। सिर्फ इतना ही नहीं माओवादियों को रोकने में भी उन्होंने अपनी कुशलता का परिचय दिया था।
दावा किया जाता है कि खागड़ागढ़ विस्फोट मामले में उन्होंने ही पहली गिरफ्तारी की थी। सिर्फ इतना ही नहीं, जानकारों की मानें तो संदेशखाली मामले में भी शाहजहां शेख को गिरफ्तार करने में उन्होंने अपनी कुशलता का एक बार फिर से परिचय दिया था। इसके अलावा कहा जाता है कि कई मामलों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने बड़े फैसलों से पहले राजीव कुमार के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही अंतिम निर्णय लेती हैं।
हालांकि राजीव कुमार के नाम के साथ कई विवाद भी जुड़े रहे हैं जिनमें वर्ष 2019 में सारदा चिटफंड मामले में उनके घर तक CBI का पहुंचना और हाल ही में कोलकाता के युवाभारती स्टेडियम में हुए मेसी कांड के बाद उनको 'कारण बताओ नोटिस' जारी करना शामिल है।