कोलकाता : सिलिगुड़ी में एक कार्यक्रम में पहुंचकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ शिकायत की झलक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बातों में है। शाम को धरनास्थल से ममता ने कहा, ‘राष्ट्रपति को भी राजनीति बेचने के लिए भेजा गया, वे उसी जाल में फंस गए।’
सिलिगुड़ी अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन में शामिल होते हुए कार्यक्रम की व्यवस्था पर राष्ट्रपति ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इसके जवाब में ममता ने कहा, ‘साल में एक बार आइए, मैं रिसीव करूंगी। लेकिन साल में पचास बार आएंगे तो मेरे पास क्या समय है? मैं लोगों के साथ खड़ी हूं और SIR को लेकर धरने पर हूं, आपकी मीटिंग में कैसे जाऊं? मेरी प्राथमिकता क्या है? आपके लिए बीजेपी प्राथमिकता है, मेरी प्राथमिकता लोग है।’
दूसरी ओर राष्ट्रपति की शिकायत को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सख्त टिप्पणी की।
शनिवार के कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कहा, ‘मुझे ऐसा नहीं लगता कि संथाल या आदिवासी समाज के लोग सरकारी किसी भी सुविधा का लाभ प्राप्त कर पा रहे हैं। वे सभी सरकारी सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं या नहीं, इस पर हमें संदेह है।’
इसके जवाब में ममता ने धरनास्थल से कहा, ‘जब मणिपुर में आदिवासियों पर अत्याचार हो रहा था, तब आप चुप क्यों थे? तब विरोध क्यों नहीं किया? देश के अन्य राज्यों में आदिवासियों पर अत्याचार होते हैं तो आप चुप रहते हैं। बंगाल को ही निशाना क्यों बनाया?’ अपने भाषण के दौरान ममता ने राज्य सरकार द्वारा आदिवासी समुदाय के लिए किए गए कामों का विवरण भी पेश किया।
सुबह के कार्यक्रम में राष्ट्रपति के बयान को उद्धृत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ‘जनजाति समुदाय से उठी राष्ट्रपति महोदया की पीड़ा और चिंता ने भारत के लोगों के मन में गहरा दुख उत्पन्न किया है। पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने वास्तव में सभी सीमाओं का उल्लंघन किया है। राष्ट्रपति के प्रति इस असम्मान के लिए उनकी प्रशासन जिम्मेदार है।’
प्रधानमंत्री ने आगे लिखा, ‘यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को पश्चिम बंगाल सरकार इतनी हल्के ढंग से देख रही है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इस पद की गरिमा हमेशा बनाए रखी जानी चाहिए। आशा है कि पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस की समझदारी जागेगी।’
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— Narendra Modi (@narendramodi) March 7, 2026
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आदिवासी समुदाय के लिए किए गए कार्यों पर संदेह जताते हुए ममता ने राष्ट्रपति से कहा, ‘आप हमारी आलोचना कर सकते हैं। लेकिन वास्तविक बदलाव नहीं होगा। लेकिन SIR के बारे में कुछ नहीं कहा। कितने आदिवासियों के नाम SIR से हटा दिए गए, आप जानते हैं? उनके अधिकार छीन लिए गए। कृपया एक बार जांच करिए। संतालों के लिए हम क्या करते हैं, यह भी जांच करिए।’
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समय मांगकर राज्य के आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि वे राज्य सरकार को अपना खाता-पत्र जमा करें।