राज्य के करीब 60 लाख लोगों का मामला 'अंडर एजूडिकेशन' अथवा 'विचाराधीन' बताकर अभी भी लंबित है। इन मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच पूरी होने से पहले ही क्या चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर देगा? अगर ऐसा हुआ तो क्या 'विचाराधीन' मतदाता इस बार के चुनाव में मतदान कर सकेंगे? इस तरह के कई सवाल राज्य की राजनैतिक गलियारों में सुनाई दे रहे हैं।
सिर्फ तृणमूल कांग्रेस ही नहीं बल्कि वामपंथी नेताओं और भाजपा ने भी मांग की है कि जब तक 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक चुनाव न करवाया जाए। ऐसी स्थिति में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा है। पर क्या लिखा है उन्होंने अपने पत्र में? क्या उन्होंने चुनाव की तारीखों की घोषणा करने की मांग की है?
जी नहीं, अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जो पत्र लिखा है उसमें उन्होंने 'एडजुडिकेशन' सूची में शामिल मतदाताओं के दस्तावेजों के दैनिक निपटारे के आधार पर सप्लिमेंट्री मतदाता सूची जारी करने की मांग की है। यह सप्लीमेंट्री मतदाता सूची अंतिम मतदाता सूची के एक हिस्से के तौर पर मानी जाएगी।
पत्र में अभिषेक बनर्जी ने क्या लिखा?
अपने पत्र में अभिषेक बनर्जी ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रत्येक दिन न्यायाधीश जिन मामलों का निपटारा करेंगे, स्वच्छता व पारदर्शिता को बनाए रखते हुए उन्हें जारी किया जाना चाहिए। ताकि आम लोग भी देख सकें। जिनका नाम हटाया गया वे फैसले के पुनर्विचार के लिए आवेदन कर सकें। बताया जाता है कि अभिषेक बनर्जी के इस पत्र की एक प्रति राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल को भी भेजी गयी है।
अभिषेक बनर्जी के इस पत्र के बाद ही राज्य के 'अंडर एजूडिकेशन' अथवा 'विचाराधीन' मतदाताओं का निपटारा हुए बगैर राज्य के विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा को लेकर एक बार फिर से सवाल उठाए जा रहे हैं। इस मामले में CEO मनोज अग्रवाल ने कहा कि चुनाव से संबंधित तारीख की घोषणा मैं नहीं करता हूं। मेरा कोई अधिकार नहीं है। चुनाव आयोग मेरे साथ इस बारे में कोई बात भी नहीं करेगा। यह सिर्फ चुनाव आयोग ही बता सकेगा। आयोग के प्रतिनिधि चार राज्यों में घूमकर यहां आ रहे हैं। वहीं यह फैसला लेंगे।
बता दें, कल यानी रविवार को राज्य में चुनाव आयोग का फुलबेंच आने वाला है। सोमवार की सुबह से वे नियमानुसार चुनाव की तैयारियों को लेकर राज्य के 8 राजनैतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मिलेंगे और बात करेंगे। सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात के दौरान भी राजनीतिक पार्टियां 'अंडर एजूडिकेशन' अथवा 'विचाराधीन' मुद्दा उठा सकती हैं।
वहीं मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बंगाल में स्पेशल इनटेंसिव रिविशन (SIR) से संबंधित मामले की सुनवाई होगी। चुनाव आयोग व राजनैतिक पार्टियां अदालत के फैसले का इंतजार कर रही है। उस दिन भी राज्य में चुनाव आयोग की फुलबेंच मौजूद रहेगी।