गुरुवार (5 फरवरी) को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के कर्मचारियों द्वारा दायर महंगाई भत्ता मामले में अपना फैसला सुनाया। यह फैसला राज्य कर्मचारियों के पक्ष में गया जिसके बाद से ही शिकायतकर्ता व समान महंगाई भत्ता (DA) की मांग पर आंदोलन करने वाले सरकारी कर्मचारी संगठनों में उत्साह देखा जा रहा है। मीडिया से हुई बातचीत में इन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अब बकाया DA पाने के लिए बस कुछ समय का इंतजार शेष रह गया है।
DA को लेकर मामला दायर करने वाले संगठन कॉन्फडरेशन ऑफ स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लाइज के अध्यक्ष श्यामल मित्र का कहना है, "वर्ष 2016 में हमने सबसे पहले मामला दायर किया था। हम बहुत आनंदित हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह साबित कर दिया कि DA राज्य सरकार के कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है।"
वहीं मामला दायर करने वाले एक अन्य संगठन 'सरकारी कर्मचारी परिषद' के अध्यक्ष देवाशिष सील का कहना है कि पिछले 10 सालों से चल रही लड़ाई के बाद अब सरकारी कर्मचारियों ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कह दिया है कि आर्थिक असुविधा के मुद्दे को स्वीकार नहीं किया जाएगा। आज बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशी का दिन है।
केंद्र सरकार के बराबर DA देने की मांग पर मामला दायर करने वाले एक अन्य संगठन 'यूनिटी फोरम' की ओर से देवप्रसाद हल्दार का कहना है, "इस फैसले से राज्य सरकार के कर्मचारी काफी खुश हैं। हमारे सामने DA पाने का रास्ता सिर्फ कानूनी लड़ाई ही थी। हम उसमें सफल हुए हैं। हमें उम्मीद है कि इस फैसले की वजह से बकाया DA भी मिलेगा।"
संग्रामी संयुक्त मंच के कन्वेनर भाष्कर घोष ने कहा कि पिछले 14 सालों से जो लोग चुप करवा रहे थे आज उनके चुप होने का दिन है। वहीं तृणमूल समर्थक कर्मचारी संगठन के कन्वेनर प्रताप नायक से DA के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद प्रतिक्रिया जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने न तो कॉल उठाया और न ही मैसेज का कोई जवाब दिया।
गौरतलब है कि गुरुवार को DA संबंधित मामले का फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि महंगाई भत्ता पाना सरकारी कर्मचारी का कानूनी अधिकार है। इसके साथ ही राज्य सरकार के कर्मचारियों का बकाया DA देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन करने का भी आदेश दिया है। यह कमेटी ही राज्य सरकार के साथ बातचीत कर DA देने के मामले को निपटाएगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि 6 सप्ताह के अंदर 25% DA दे देना होगा।