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जयपुर में पैरामेडिकल परीक्षा में नकल गिरोह का भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार

जयपुर परीक्षा कांड: प्राइवेट कॉलेजों की मिलीभगत से नकल कराने की योजना फेल

जयपुर : जयपुर में पैरामेडिकल परीक्षा के दौरान कथित रूप से नकल कराने की एक संगठित साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अदालत ने उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस के अनुसार यह मामला पेपर लीक का नहीं बल्कि परीक्षा केंद्र के भीतर फर्जी कक्ष निरीक्षक (इन्विजिलेटर) नियुक्त कर नकल कराने की योजना से जुड़ा है।

जयपुर पश्चिम की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) प्रशांत किरन ने बताया कि यह पूरा नेटवर्क प्राभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज, मुंडोटा (कालवाड़ रोड) से संचालित किया जा रहा था, जहां पैरामेडिकल परीक्षा आयोजित की जा रही थी। जांच के दौरान सामने आया कि परीक्षा व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएँ की गई थीं और बड़े पैमाने पर अव्यवस्था फैलाई गई थी।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कृष्ण कुमार सैनी, एस करण कॉलेज के पैरामेडिकल विभाग के विभागाध्यक्ष (एचओडी), शंकर लाल जाट, एस करण कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग के लेक्चरर, रामकृष्ण मंडीवाल, प्राभा मेमोरियल पीजी कॉलेज से जुड़े सदस्य तथा देवकृष्ण मंडीवाल, प्राभा मेमोरियल पीजी कॉलेज के प्रशासक शामिल हैं।

डीसीपी प्रशांत किरण ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा आयोजित परीक्षाओं को लेकर सूचना मिली थी। विशेष रूप से प्राभादेवी मेमोरियल कॉलेज, कावरी डूंगरी स्थित परीक्षा केंद्र पर संदेह जताया गया था, जहां कॉलेज के संस्थापक द्वारा झुंझुनूं स्थित एक कॉलेज के कुछ छात्रों के साथ मिलकर परीक्षा की निगरानी व्यवस्था को प्रभावित करने की साजिश रची गई थी।

उन्होंने बताया कि सूचना के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान शुरू की। जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा का समय दोपहर 3:00 बजे निर्धारित था, लेकिन प्रश्न पत्र लगभग 3:40 से 3:45 बजे के बीच वितरित किए गए, जिससे परीक्षा संचालन पर सवाल खड़े हुए।

पुलिस कार्रवाई के दौरान दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। इनके पास से दो डायरी बरामद हुईं, जिनमें छात्रों के नाम और नकल व्यवस्था के लिए ली गई कथित रकम का विवरण दर्ज था। इसके अलावा मोबाइल फोन से पीडीएफ प्रारूप में प्रवेश पत्र और व्हाट्सऐप चैट भी मिलीं, जिनमें अभ्यर्थियों से संपर्क और परीक्षा केंद्रों की जानकारी साझा करने के संकेत मिले।

जांच अधिकारियों के अनुसार परीक्षा नियंत्रक से जुड़ी जानकारियों की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे प्रकरण की सभी परतें खोली जा सकें। पुलिस ने यह भी पाया कि जिस परीक्षा केंद्र पर यह परीक्षा आयोजित की गई, उसकी क्षमता लगभग 1500 छात्रों की थी, लेकिन वहां करीब 2500 अभ्यर्थियों को बैठाने की व्यवस्था की गई थी।

छात्रों ने भी परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की। उनका कहना था कि प्रश्न पत्रों का वितरण अव्यवस्थित तरीके से किया गया और कुछ मंजिलों पर पहले तथा कुछ पर बाद में प्रश्न पत्र दिए गए। यह परीक्षा केंद्र एक गांव में स्थित था, जो शहर से लगभग डेढ़ घंटे की दूरी पर है और वहां बुनियादी ढांचे तथा बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी।

पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले छात्रों में भारी आक्रोश फैल चुका था। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि उपलब्ध क्षमता से कहीं अधिक छात्रों को परीक्षा केंद्र पर बैठाया गया था, जिसके चलते अस्थायी और अव्यवस्थित व्यवस्थाएं करनी पड़ीं। डीसीपी प्रशांत किरन ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो वायरल हो रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि केंद्र के संस्थापक द्वारा पहले से ही कुछ मामलों में कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति में भूमिका निभाई गई थी, जिसके चलते उन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि कुछ छात्रों से पैसे लिए गए और चुनिंदा इन्विजिलेटर नियुक्त करने की योजना बनाई गई थी, जिससे परीक्षा में अनुचित साधनों से मदद की जा सके। हालांकि पुलिस को समय रहते खुफिया जानकारी मिल गई और त्वरित कार्रवाई करते हुए इस पूरी योजना को विफल कर दिया गया।

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