हिजाब पहनने के कारण एक छात्रा को प्रतियोगी परीक्षा से वंचित किए जाने के मामले में राजस्थान उच्च न्यायालय ने सख्त रूख अपनाया। छात्रा अलीशा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने संबंधित पक्षों से स्पष्ट रूप से जवाब मांगा है। अलीशा ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर द्वारा आयोजित शिक्षक सीधी भर्ती परीक्षा 2025 (स्तर-II, सामाजिक अध्ययन) के लिए आवेदन किया था। अलीशा बूंदी जिले के सावतगढ़, हिंडोली क्षेत्र की रहने वाली है। उसे कोटा के महावीर नगर एक्सटेंशन स्थित तिलक स्कूल में परीक्षा केंद्र आवंटित हुआ था लेकिन जब 18 जनवरी को वह परीक्षा देने पहुंची तो केंद्र के आयोजकों ने हिजाब को नियमों का उल्लंघन मानते हुए एंट्री नहीं दी। अब परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से रोकने का यह मामला कोर्ट पहुंच गया है।
वकील का तर्क- हिजाब से चेहरा नहीं ढका
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं, एडवोकेट अजीत कस्वां और अंसार इंदौरी ने बताया कि छात्रा के धार्मिक अधिकारों और संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन हुआ। छात्रा अपनी आस्था के अनुसार हिजाब पहनती है, जो केवल सिर को ढकता है, चेहरे को नहीं।
आवश्यक दस्तावेज होने के बावजूद नहीं मिली एंट्री
वकीलों की ओर से दलील दी गई, "छात्रा सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंची। फिर भी उसे केवल हिजाब पहनने के कारण प्रवेश से रोका गया, जबकि उसका चेहरा पूरी तरह दिखाई दे रहा था। पहचान सत्यापन के लिए भी वह पूरी तरह तैयार थी।"
परीक्षा में फिर से शामिल होने का मांगा अवसर
याचिका में मांग की गई है कि याचिकाकर्ता को पुनः परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिले और प्रतियोगी परीक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति देने के लिए सुरक्षा उपायों के साथ दिशानिर्देश तैयार किए जाएं। वहीं, इस पूरे मामले में परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड और केंद्र के अधीक्षक से जवाब मांगा है।