🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

बजट सत्र से पहले राजस्थान में सियासी हलचल, 27 जनवरी को सर्वदलीय बैठक

बजट सत्र से पहले राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवणानी ने 27 जनवरी को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, वहीं मतदाता सूची में कथित हेरफेर को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है।

By प्रियंका कानू

Jan 21, 2026 16:11 IST

जयपुर: आगामी बजट सत्र से पहले राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवणानी ने 27 जनवरी को सर्वदलीय बैठक बुलाई है, ताकि सदन का कामकाज सुचारु और प्रभावी तरीके से चल सके। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बजट सत्र विधानसभा के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। सार्थक बहस और रचनात्मक सुझावों के लिए मैंने सभी से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की है और यह बैठक भी बुलाई है।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, स्पीकर देवणानी ने विपक्ष की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि विपक्ष को जनता से जुड़े मुद्दे उठाने चाहिए और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उन मुद्दों पर उचित जवाब दे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि सदन के नियमों के तहत चर्चा की जाती है, तो किसी भी विषय पर बहस से इनकार नहीं किया जाएगा।

इस बीच राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष और सांसद हनुमान बेनीवाल ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए ताकि चुनाव आयोग और अन्य संस्थाओं पर जनता का विश्वास बना रहे।

सोमवार को कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राजस्थान में भाजपा सरकार विपक्ष समर्थक मतदाताओं के नाम हटाकर मतदाता सूची में हेरफेर करने की साजिश रच रही है। कांग्रेस का दावा है कि यह गुप्त कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष के निर्देश पर की जा रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि बीएल संतोष और बाद में अमित शाह के राज्य दौरे के बाद मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में तेजी आई।

डोटासरा ने कहा कि पहले सब कुछ सामान्य चल रहा था लेकिन 3 जनवरी को बीएल संतोष के राज्य दौरे और पार्टी नेताओं के साथ बैठकों के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की कथित फर्जी प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को आशंका है कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की समयसीमा बढ़ा सकते हैं, ताकि कांग्रेस विचारधारा से जुड़े लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकें।

Prev Article
राजस्थान के किसानों ने खोजी सरसों की ऐसी जादुई किस्म, जो देगी दोगुना मुनाफा; कृषि वैज्ञानिक भी हैरान
Next Article
बाड़मेर के पूर्व कांग्रेस विधायक मेवाराम जैन पर दर्ज रेप केस की पूरी कहानी, जिसने दिलाई 'भंवरी देवी केस' की याद

Articles you may like: