कहते हैं कि मिट्टी और बीज की जो परख एक किसान को होती है, वो किसी लैब में बैठे वैज्ञानिक को भी शायद ही हो। राजस्थान के बारां जिले के दो किसानों ने इस बात को सच कर दिखाया है। नरसिंहपुरा गांव के राजकुमार शर्मा और महेंद्र प्रताप सिंह ने सरसों की एक ऐसी नई किस्म खोज निकाली है, जो न सिर्फ देखने में अलग है, बल्कि पैदावार भी सामान्य सरसों से दोगुनी दाम देने का दम रखती है।
एक पौधे से शुरू हुआ 12 बीघा का सफर
यह कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है। किसान राजकुमार शर्मा बताते हैं कि 3 साल पहले साल 2023 में उन्हें अपनी सरसों की फसल के बीच एक अजीब सा पौधा दिखाई दिया। वह पौधा सामान्य से काफी अलग था, इसलिए उन्होंने उसे संभाल लिया। 2025 साल 2025 रबी सीजन में 8 बीघा खेत में राजकुमार शर्मा और महेंद्र प्रताप सिंह ने अपने खेत में नई किस्म का बीज डाला। आज उसी बीज की बदौलत करीब 12 बीघा (8 बीघा राजकुमार के और 4 बीघा रामपाल के ) खेत में यह नई सरसों लहलहा रही है।
क्या है इस नई सरसों की खासियत ?
सोशल मीडिया पर भी इन खेतों की तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं। इस फसल को देखने के लिए दूर-दराज से किसान पहुंच रहे हैं और हैरान रह जाते हैं। इसकी कुछ बड़ी खूबियां इसे खास बनाती हैं। इसके पौधे सामान्य सरसों के मुकाबले काफी लंबे और घने हैं। पत्तियां और फलियां भी आकार में बड़ी हैं। इस किस्म में बुवाई के 90 दिन बाद फूल आते हैं और करीब 165 दिन में फसल तैयार होती है। खास बात यह है कि पूरी फसल के दौरान सिर्फ तीन बार पानी देने की जरूरत पड़ती है। किसानों को उम्मीद है कि प्रति बीघा करीब 10 क्विंटल उत्पादन मिलेगा, जो आम सरसों से लगभग दोगुना है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा है।
कृषि विभाग तक पहुंचा मामला
किसानों का कहना है कि सरसों की नई वैरायटी की जानकारी कृषि विभाग को दे दी गई है। हालांकि अब तक कोई अधिकारी अनुसंधान या अवलोकन के लिए कोई भी कृषि वैज्ञानिक जांच के लिए नहीं पहुंचा, लेकिन किसानों में इस नई वैरायटी के बारे में जानने का लगातार क्रेज बना हुआ है। इसी को लेकर कृषि विभाग कोटा के संयुक्त निदेशक अतिश कुमार शर्मा और कृषि वैज्ञानिक डॉ. डीके सिंह का मानना है कि फसल सामान्य से अलग दिख रही है और विस्तृत पता जांच के बाद ही लगेगा।
नई किस्म को लेकर हैरान है किसान
इसी तरह नरसिंहपुरा के आसपास के गांवों के किसान राजकुमार शर्मा और महेंद्र प्रताप सिंह 8 बीघा खेत में बोई गई सरसों की नई किस्म को लेकर हैरान हैं। उनका कहना है कि अगर सरसों की फसल सामान्य किस्म से अलग दिखेगी तो इसका उत्पादन भी अलग होगा।