चेन्नई : तमिलनाडु के महाबलीपुरम से बिहार तक लगभग 2100 किलोमीटर लंबा सफर श्रद्धालुओं नें तय की। इतना लम्बा सफर कय करने के बाद आखिरकार दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की यात्रा बीच रास्ते में ही रुक गई। इसका गंतव्य पूर्वी चंपारण में बनने वाला विराट रामायण मंदिर था लेकिन रास्ते में राज्य की जर्जर बुनियादी ढांचा सबसे बड़ी बाधा बन गया।
210 मीट्रिक टन वज़न वाले भारी ग्रेनाइट पत्थर से बने इस शिवलिंग का भार क्या गोपालगंज का डुमरियाघाट पुल सहन कर पाएगा? इसी चिंता के कारण यात्रा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि पुल में पहले से ही दरारें दिखाई दे रही हैं। ऐसे में किसी बड़े हादसे का खतरा बढ़ गया है।
नवंबर में शुरू हुई यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए किसी उत्सव से कम नहीं थी। लेकिन गोपालगंज पहुंचते ही भगवान की यात्रा में शामिल लोगों को प्रशासनिक और इंजीनियरिंग चुनौतियों का सामना करना पड़ा। नेशनल हाईवे अथॉरिटी और लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने साफ कहा है कि पुल की मौजूदा हालत में 160 टन वज़न वाले ट्रक और उस पर लदे 210 टन के शिवलिंग का संयुक्त भार उठाना लगभग असंभव है। इससे पुल के टूटने की आशंका है।
प्रशासन अब बेतिया होते हुए या अन्य ग्रामीण सड़कों से वैकल्पिक मार्ग तलाशने में जुटा है लेकिन वहां भी कलवर्ट और छोटे पुल बड़ी समस्या बने हुए हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इस यात्रा में शामिल लोगों को बलथरी चेकपोस्ट पर ही रोक दिया गया है।
चेकपोस्ट पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है और पूजा-अर्चना का दौर जारी है। हालांकि यह शिवलिंग तय समय पर मंदिर तक पहुंच पाएगा या नहीं, यह अब सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।