अहमदाबादः भारतीय अंतरिक्ष संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है लेकिन उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं में आगे लाने के लिए और अधिक समर्थन की आवश्यकता है। यह बात भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) की निदेशक प्रोफेसर अन्नपूर्णि सुब्रमणियम ने बुधवार को कही। वह यहां फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) में आयोजित 5वें एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) सिम्पोजियम के उद्घाटन के मौके पर बोल रही थीं।
IIA की पहली महिला निदेशक प्रो. सुब्रमणियम ने कहा कि भारत अंतरिक्ष अनुसंधान और खोज के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है और इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। हालांकि शीर्ष नेतृत्व स्तर पर महिलाओं की मौजूदगी अभी भी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल कार्यबल तक सीमित न रखकर निर्णय लेने और नेतृत्व की भूमिकाओं में शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए संस्थागत और पारिवारिक समर्थन दोनों जरूरी हैं। लचीले कार्य घंटे जैसी सहायक नीतियां अधिक महिलाओं को अपने करियर को जारी रखने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। प्रो. सुब्रमणियम ने कहा कि देश अपने लगभग 50 प्रतिशत प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में सम्मेलनों और संगोष्ठियों में महिला वक्ताओं की संख्या बढ़ी है जो एक सकारात्मक संकेत है लेकिन यह बदलाव रातों रात नहीं होगा। इसके लिए परिवार, संस्थान और समाज तीनों को मिलकर सचेत प्रयास करने होंगे।
उल्लेखनीय है कि प्रो. अन्नपूर्णि सुब्रमणियम ने एस्ट्रोसैट मिशन, यूवी अध्ययन और थर्टी मीटर टेलीस्कोप (TMT) परियोजना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2024 में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (विज्ञान श्री) से सम्मानित किया गया।