गुवाहाटीः हाल ही में ओडिशा भाजपा के सोशल मीडिया हैंडल पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से जुड़ा एक वीडियो पोस्ट किया गया था। उस वीडियो में उन्हें बंदूक ताने हुए देखा गया और कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाते हुए दिखाया गया। वीडियो पोस्ट होते ही विवाद शुरू हो गया। इस वीडियो के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसे सोमवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने खारिज कर दिया।
सोमवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली के पीठ के समक्ष मामला पेश हुआ। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ताओं ने पहले गौहाटी हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “आपको हाईकोर्ट जाने से किसने रोका है? क्या आप यह कहना चाहते हैं कि हाईकोर्ट भी राजनीतिक युद्धक्षेत्र बन गया है?”
इस मामले के संदर्भ में पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि चुनावी लड़ाई का एक हिस्सा शीर्ष अदालत में लड़ा जा रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि हाईकोर्ट की शक्तियों का गलत आकलन न किया जाए। याचिकाकर्ताओं को पूरे मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने को कहा गया और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को मामले की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए इस वीडियो के अलावा ‘मिया मुस्लिम’ समुदाय को लेकर असम के मुख्यमंत्री के कथित विवादित बयानों को लेकर भी तीखी आलोचना हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि ऐसे बयान एक विशेष समुदाय के खिलाफ घृणा फैलाने के उद्देश्य से दिए गए। हालांकि असम के मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए दावा किया कि उनका बयान किसी विशेष समुदाय के लिए नहीं, बल्कि घुसपैठियों के खिलाफ था।